आरबीआई ने ग्रामीण और उप-शहरी इलाकों में सूक्ष्म वित्तीय संस्थानों के लिए कर्ज देने की सीमा 1 लाख से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये कर दी। गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और सूक्ष्म वित्तीय संस्थानों से कर्ज लेने की योग्यता का दायरा भी बढ़ा दिया। ग्रामीण इलाकों में 1.25 लाख रुपये तक सालाना आय वाले भी कर्ज ले सकेंगे। पहले यह सीमा एक लाख रुपये तक थी। शहरी और उप-शहरी इलाकों में ऐसे संस्थानों के ग्राहकों के लिए आय सीमा 1.60 लाख से बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दी गई।
पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक (पीएमसी बैंक) पर अनियमितताओं की वजह से प्रतिबंध लगने से लोगों के मन में चिंताएं हैं। शक्तिकांत दास ने कहा, किसी एक घटना को सभी सहकारी बैंकों के संदर्भ में नहीं देखना चाहिए। इन बैंकों के नियमन की फिर से समीक्षा की जाएगी। सरकार से इस बारे में चर्चा करेंगे। दास ने कहा कि बैंकिंग प्रणाली दुरुस्त और सुरक्षित है। चिंता की कोई बात नहीं है।
आरबीआई के इस साल लगातार पांचवीं बार रेपो रेट में कटौती से सुस्त चल रही अर्थव्यवस्था एक बार फिर रफ्तार पकड़ सकती है। नीति आयोग का कहना है कि खुदरा कर्ज की मांग में तेजी आने से रियल एस्टेट और ऑटो क्षेत्र को संजीवनी मिल सकती है, तो बड़े कर्ज उठाने वाले औद्योगिक जगत की गतिविधियां भी कर्ज सस्ता होने के बाद बढ़ने की उम्मीद है। वित्त मंत्रालय ने भी आरबीआई के इस कदम को निर्णायक बताया है।
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद कहा कि सरकार और रिजर्व बैंक अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ्तार को बढ़ाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। निजी उपभोग और निवेश बढ़ाने के लिए समय-समय पर प्रोत्साहन भरे कदम उठाए जाएंगे।