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सोलह साल की कसरत के बाद एेतिहासिक GST बिल पास, आर्थिक सुधार का नया युग शुरू

Thu, 04 Aug 2016 06:55 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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केंद्र की मोदी सरकार ने आजादी के बाद भारत के सबसे बड़े कर सुधार की दिशा में बुधवार को मील का पत्थर हासिल कर लिया। सरकार और विपक्ष के बीच बनी सहमति के बाद राज्यसभा ने बुधवार को करीब 7 घंटे की मैराथन और बेहतरीन चर्चा के बाद वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) बिल को सर्वसम्मति से हरी झंडी दे दी।
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समान वैट की व्यवस्था के तहत वस्तु एवं सेवा कर राज्यों के विभिन्न करों और स्थानीय करों की जगह लेगा। इसके लागू होने से भारत दुनिया के सबसे बड़े एकल बाजार में बदल जाएगा। जीएसटी बिल 122वां संविधान संशोधन विधेयक है।

बिल के समर्थन में सदन में उपस्थित सभी 203 सदस्यों ने वोट दिए। विरोध में कोई वोट नहीं पड़ा। जीएसटी के विरोध में रही एकमात्र पार्टी अन्नाद्रमुक के सांसदों ने सरकार के अनुरोध के मद्देनजर खुद को वोटिंग से दूर रखा। उच्च सदन के इस फैसले को आर्थिक सुधार के क्षेत्र में नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।
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जीएसटी पर पिछले 10 साल से एक दूसरे का तीखा विरोध कर रही भाजपा और कांग्रेस ने बुधवार को आपसी सहमति दिखा कर एतिहासिक आर्थिक सुधार का रास्ता खोल दिया है। अन्य विपक्षी दलों ने भी बिल के कई प्रावधानों पर एतराज तो जताया, मगर अंतत: बिल के पक्ष में खड़े होकर उच्च सदन में अल्पमत वाली एनडीए सरकार का काम आसान कर दिया।

बिल पारित करने के दौरान जीएसटी की दर और इसके कई प्रावधानों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी हुई। बिल पारित कराने के दौरान कई संशोधनों पर वोटिंग की भी नौबत आई। खासतौर पर जीएसटी दर पर तीखी नोंकझोंक हुई।

विपक्ष खासतौर से कांग्रेस ने जीएसटी दर की सीमा 18 फीसदी रखने की मांग की। जवाब में जेटली ने कहा कि इसका फैसला जीएसटी काउंसिल करेगी। जीएसटी कानून के बाद सेंटर जीएसटी, स्टेट जीएसटी और इंटीग्रेटेड जीएसटी के लिए कानून बनना है।

विपक्ष ने इन बिलों को मनी बिल की जगह वित्त बिल के रूप में पेश किए जाने का भरोसा दिए जाने की मांग की। हालांकि सरकार ने इस पर कोई आश्वासन नहीं दिया और जीएसटी को 1 अप्रैल 2017 तक लागू करने की मंशा जाहिर की।

इससे पहले बिल पर उच्च सदन में उच्च स्तरीय चर्चा हुई। बिल का समर्थन करने पर राजी हुई कांग्रेस की ओर से चर्चा की शुरुआत करते हुए पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम कई सुझाव देने के साथ ही बार बार इस बिल का श्रेय लेते दिखाई दिए।

इस पर पलटवार करते हुए वित्त मंत्री जेटली ने बिल को कानूनी जामा पहनाने की सिरदर्दी का हवाला देते हुए कहा कि जीएसटी लागू कराना दुरूह कार्य है। जबकि पूर्व वित्त मंत्री होना आराम की बात है।

कांग्रेस की ओर से चिदंबरम और आनंद शर्मा ने कई मौकों पर सरकार पर तीखा हमला बोला, जबकि सरकार की ओर से वित्त मंत्री जेटली और भाजपा सांसद भूपेंद्र यादव सियासी चतुराई दिखाते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोलने से बचते दिखे।

वित्त मंत्री ने जीएसटी की कई खूबियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद कर चोरी करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे कर मामले में पारदर्शिता आने के साथ ही व्यापार करना आसान होगा।

राज्यों के अधिकार के हनन और इसके जरिए केंद्र को वीटो हासिल होने के आरोप को वित्त मंत्री ने आधा सच बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र की तरह राज्यों के पास भी वीटो है। कर नीति से केंद्र को अलग नहीं रख सकते।

राज्यों के पास अधिकार होना चाहिए, मगर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि केंद्र के हाथों में अधिकार के बिना संघीय ढांचे का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। टीएमसी के डेरेक ओ ब्रायन ने बिल के करीब एक दशक तक लटके रहने के लिए कांग्रेस और भाजपा की खिंचाई की।

इससे पहले चर्चा के दौरान खासतौर पर जीएसटी दर और बाद में आने वाले सीजीएसटी, एसजीएसटी और आईजीएसटी पर तीखी बहस हुई। विपक्ष ने आशंका जताई कि सरकार इन बिलों पर चर्चा से बचने के लिए इसे मनी बिल के रूप में पेश कर सकती है।

विपक्ष ने इन बिलों को भी वित्त बिल के तौर पर पेश करने का सरकार से भरोसा मांगा। इस पर वित्त मंत्री ने कोई ठोस आश्वासन देने के बदले कहा कि इस पर कोई भी फैसला लेते समय संवैधानिक परंपराओं का ध्यान रखा जाएगा।

क्या है जीएसटी?
1991 के आर्थिक सुधारों के बाद वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) भारत के अप्रत्यक्ष कर ढांचे में सबसे बड़ा सुधार है। संविधान के 122वें संशोधन के बाद जीएसटी देशभर में लागू हो जाएगा। इस बिल के लागू होने के बाद सभी केंद्रीय स्तर और राज्य स्तर के विभिन्न करों के जगह एक ही कर लगाया जाएगा। जीएसटी लागू होने के बाद वस्तुओं एवं सेवाओं पर केवल तीन तरह के टैक्स वसूले जाएंगे। 
- सेंट्रल जीएसटी
- स्टेट जीएसटी
- इंटीग्रेटेड जीएसटी

जीएसटी के रोडमैप के बारे में आज घोषणा करेगी सरकार

राजस्व सचिव हंसमुख अधिया ने बुधवार को कहा कि सरकार जीएसटी के रोडमैप के बारे में बृहस्पतिवार को घोषणा करेगी। राज्यसभा में जीएसटी विधेयक पारित होने पर अपनी प्रतिक्रिया में अधिया ने कहा कि यह केवल एक शुरुआत है।

वास्तविक काम अब शुरू होगा। हम क्रियान्वयन के रोड मैप की घोषणा बृहस्पतिवार को करेंगे। उन्होंने कहा कि अब इस दिशा में बेहद तेजी से काम किया जाएगा। सरकार चाहती है कि इसे जल्द से जल्द क्रियान्वित किया जाए।

मोदी ने कहा, ऐतिहासिक क्षण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में ऐतिहासिक जीएसटी विधेयक पास होने पर सभी राजनीतिक दलों के नेताओं का धन्यवाद किया है। उन्होंने लगातार कई ट्वीट कर इसे सही मायने में एक ऐतिहासिक क्षण करार दिया।

उन्होंने कहा कि जीएसटी संघीय व्यवस्था में सहयोग का बेहतरीन उदाहरण है। हम साथ मिलकर भारत को प्रगति की एक नई ऊंचाई पर ले जाएंगे। उन्होंने कहा कि देश को एक नई कर व्यवस्था देने के लिए सांसदों को निश्चित तौर पर धन्यवाद दिया जाना चाहिए। इस सुधार से मेक इन इंडिया अभियान को बल मिलेगा, निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। 
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कानून का रूप लेने में लगेगा वक्त

उच्च सदन ने हालांकि जीएसटी बिल पर सहमति दे दी है, मगर इसे कानून का रूप लेने में अभी लंबा वक्त लगेगा। बिल को जहां लोकसभा की मंजूरी की जरूरत पड़ेगी, वहीं इस पर 15 राज्यों की सहमति भी हासिल करनी होगी। इस कानून के बाद सेंटर जीएसटी, स्टेट जीएसटी और इंटीग्रेटेड जीएसटी के लिए कानून बनना है।

122 वां संविधान संशोधन
राज्यसभा में जीएसटी बिल 122वां संविधान संशोधन विधेयक है। आजादी के बाद का यह सबसे बड़ा कर सुधार का सरकार द्वारा उठाया गया कदम है।


सोलह साल की कसरत
2000 में वाजपेयी सरकार ने केलकर कमेटी बनाई और उसने 2004 में जीएसटी का सुझाव दिया। 2006-07 के बजट में 2010 तक जीएसटी की घोषणा की गई। इसके बाद राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति को इसका खाका तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई।

2011 में 22 मार्च को संविधान (115वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश किया। दिसंबर 2014 में लोकसभा में संविधान (122वां संशोधन) विधेयक पेश किया गया। 6 मई 2015 को विधेयक लोकसभा में पारित हो गया।
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