फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

निवेश के मंत्र 15: अगर आप अकेली मां हैं तो ऐसे रखें खुद को आर्थिक तौर पर आजाद

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Sun, 10 May 2020 05:19 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
निवेश के टिप्स - फोटो : AMAR UJALA
अभिभावक की भूमिका अकेले निभाना कई मायनों में मुश्किल है। घर संभालने के साथ साथ नौकरी करना और अपने बच्चे को पालना सभी काम अकेले करने होते हैं, ऐसे में वित्तीय योजनाओं का प्रबंध करना भी मुश्किल भरा हो जाता है। आज मातृ दिवस के दिन समझते हैं कि कैसे अकेली मां आर्थिक तौर पर आजाद रह सकती है...


जीवन बीमा

आर्थिक तौर पर खुद को आजाद रखने का सबसे पहला कदम है खुद के लिए जीवन बीमा लेना। अगर भविष्य में कुछ होता है तो बच्चों के लिए लाइफ इंश्योरेंस एक स्थाई वेतन के रुप में काम आ सकता है। किसी के लिए भी टर्म प्लान वित्तीय सुरक्षा का एक बेहतर प्लान है।


सामान्य वेतन और पेंशन के अलावा भी यह पॉलिसी डेथ बेनेफिट भी देती है जिससे पॉलिसीधारक या नॉमिनी को फायदा मिलता है। किसी अकेली मां के सबसे पहला काम है कि वह पहले अपने आर्थिक खर्चें अलग कर दें, देखें कि कितनी राशि बचती है और उसी के मुताबिक जीवन बीमा लें। 


जैसे जैसे वेतन बढ़ता जाएगा वैसे वैसे बीमे में प्रीमियम की राशि बढ़ाते रहना। इसके अलावा स्टैंडअलोन पर्सनल एक्सिडेंट पॉलिसी या क्रिटिकल बीमारी जैसे प्लान भी ले सकते हैं।


स्वास्थ्य बीमा

अगर कभी स्वास्थ्य इमरजेंसी हो जाती है तो स्वास्थ्य बीमा हमेशा मदद करता है। दो तरह के स्वास्थ्य बीमा होते हैं, एक बीमा योजना में अस्पताल में भर्ती करने पर पैसों की अदायगी हो जाती है और दूसरी योजना में कैंसर, ह्दय रोग जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए एकमुश्त राशि का भुगतान कर दिया जाता है।


जीवन बीमा के साथ कई कंपनियां कुछ राइडर्स भी देती हैं जिसमें दुर्घटना को शामिल किया जाता है। तीन से पांच लाख रुपये तक का अस्पताल कवर ले लेना चाहिए, इसमें आप पर निर्भर लोगों को भी शामिल कर सकते हैं। 


महानगरों में रहने वाली अकेली मां को दस लाख रुपये और शहरों में रहने वाली अकेली माताओं को पांच लाख रुपये तक का न्यूनतम सम एश्योर्ड लेना चाहिए।


छोटी और लंबी अवधि के लिए निवेश

छोटी और लंबी अवधि के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कॉर्पस इकट्ठा करने की बहुत जरूरत रहती है। जानकारों का मानना है कि बच्चों के नाम पर सिस्टमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान यानि एसआईपी करना बेहतर विकल्प हो सकता है। म्यूचुअल फंड में निवेश करना अच्छा विकल्प हो सकता है। 
विज्ञापन


अपनी उम्र, वेतन और जोखिम उठाने की क्षमता को देखते हुए आप कोई पारंपारिक योजना में निवेश कर सकते हैं। अगर इक्विटी में निवेश करना है तो यूलीप अच्छा विकल्प हो सकता है। इन प्लान में ज्यादा रिटर्न मिलती है।


रिटायरमेंट के लिए तैयारी करना भी लंबी अवधि का लक्ष्य हो सकता है। रिटायरमेंट के लिए निवेश करना है तो टैक्स सेविंग फंड बेहतर विकल्प रहेंगे। एनपीएस या ईएलएसएस में निवेश कर रिटायरमेंट की प्लानिंग की जा सकती है।


इमरजेंसी फंड

निवेश का एक जरूरी नियम है कि नौकरी करने के साथ ही इमरजेंसी फंड के लिए निवेश करना शुरू कर दें, ये इमरजेंसी फंड कोई बचत खाता भी हो सकता है। इमरजेंसी फंड तीन से छह महीने के वेतन के बराबर होना चाहिए। अगर वेतन में बढ़ोतरी हो रही है तो फंड में हो रहे निवेश में वृद्धि होती रहनी चाहिए।


इमरजेंसी फंड इकट्ठा करने के पीछे एक ही उद्देश्य होता है कि आपदा के समय इसको इस्तेमाल किया जा सके। इमरजेंसी फंड के लिए लिक्विड फंड या अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड में निवेश कर सकते हैं। इसमें निवेश की अवधि छोटी होती है। 


टैक्स छूट का फायदा

निवेश के कई उपकरण ऐसे भी हैं जहां निवेश करके टैक्स की बचत भी की जा सकती है। ये स्कीम ईएलएसएस, एनपीएस, पीपीएफ या दूसरी योजनाएं हो सकती हैं। एनपीएस और ईएलएसएस निवेश के ऐसे उपकरण हैं जिसमें टैक्स बचाने के साथ कॉर्पस भी बनाया जा सकता है। 


जानकार मानते हैं कि केवल टैक्स बचाना ही निवेश का एकमात्र उद्देश्य नहीं होना चाहिए। अपना निवेश पोर्टफोलियो बनाने के लिए किसी वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें ताकि लक्ष्यों को पाने की अपेक्षा में ही निवेश हो।
और पढ़ें...
विज्ञापन
विज्ञापन
Next