आयकर विभाग ने असेसमेंट वर्ष 2015-16 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए नया फॉर्म अधिसूचित कर दिया है। इस बार जो फार्म अधिसूचित किया गया है उसमें सभी बैंक खातों की अनिवार्यता तो नहीं रखी गई है, लेकिन उस वर्ष कुल बचत और चालू खाता की संख्या अवश्य बतानी होगी।
इसके साथ ही बैंक खाता संख्या और आईएफसी कोड आदि के लिए भी जगह दी गई है। रिफंड लेने के लिए किसी एक खाता का पूरा ब्यौरा तो भरना ही होगा। नए फॉर्म में आधार संख्या की भी जगह है।
गौरतलब है कि पिछली बार जो आईटीआर फॉर्म अधिसूचित हुए थे, उसमें सभी तरह के बैंक खाते और विदेश यात्रा की जानकारी मांगे जाने की वजह से इसकी खूब आलोचना हुई थी। इसके बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसे रद्द करवा दिया था और नए सिरे से फॉर्म तैयार करने का निर्देश दिया था। इस बार देर से रिटर्न फॉर्म अधिसूचित होने की वजह से 31 अगस्त 2015 तक रिटर्न दाखिल किये जा सकेंगे।
केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की अधिसूचना संख्या 49 के मुताबिक इस बार आईटीआर 1 के साथ बेहद सरलीकृत फॉर्म आईटीआर 2ए भी जारी किया गया है जिसे कोई भी वैयक्तिक करदाता या हिंदू अविभाजित परिवार भर सकते हैं, लेकिन इसके साथ एक शर्त भी लगाई गई है कि आईटीआर 2ए भरने वाले व्यक्ति का कारोबार या व्यवसाय से कोई आमदनी नहीं हो साथ ही उसे कोई पूंजीगत लाभ नहीं हुआ हो साथ ही विदेश में कोई परिसंपत्ति नहीं हो। उल्लेखनीय है कि सीबीडीटी ने पिछली बार जो फॉर्म जारी किया था, उसकी काफी आलोचना हुई थी।
खेती से आमदनी की दी जा सकेगी जानकारी
जारी अधिसूचना में सहज और सुगम फॉर्म में क्लॉज 3 की भी व्यवस्था की गई है जिसमें खेती-बारी से होने वाली आमदनी यदि 5,000 रुपये से अधिक है तो उसकी जानकारी दी जा सकेगी।
करदाताओं के बैंक खाते में सीधे जमा होगा रिफंड
आयकर विभाग एक नई योजना पर काम कर रहा है जिसके अंतर्गत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आयकर का रिफंड सुरक्षित तरीके से करदाता के व्यक्तिगत बैंक खाते में जमा हो जाए। विभाग, बैंकिंग सेवा को पूरी तरह से अपनाने पर विचार कर रहा है। वर्तमान में 50,000 रुपये से अधिक मूल्य का आयकर रिफंड चेक के माध्यम से डाक से भेजा जाता है, इसे विभाग जल्द ही समाप्त करेगा।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की अध्यक्षा अनीता कपूर ने हाल ही में कहा था कि इस योजना पर विशेष तौर पर काम किया जा रहा है और इसका लक्ष्य इस खास सेवा से संबंधित करदाताओं की शिकायतों को दूर करना है।
उन्होंने कहा कि सीबीडीटी ने जब यह पाया कि गलत रिफंड या रिफंड न मिलने की समस्या लगातार बनी हुई है तो फिर बैंक और उनके नियामक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से संपर्क किया गया।
कपूर के अनुसार, आरबीआई ने उनसे कहा कि जब रिफंड सीधे तौर पर करदाता के बैंक खाते में भेजा जाता है तो वर्तमान प्रोटोकॉल के अनुसार बैंक नाम के साथ खाता संख्या का मेल नहीं करते हैं। वे सिर्फ खाता संख्या और किस खाता संख्या से चेक जारी किया गया है, यही देखते हैं, और रिफंड जमा कर देते हैं।
अक्सर गलत खाते में चला जाता था रिफंड
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की अध्यक्षा अनीता कपूर ने कहा, ‘हमारे सामने ऐसे कई उदाहरण हैं जहां लोग खाता संख्या गलत बताते हैं और अगर हम उन खातों में रिफंड भेजते हैं और बैंकिंग प्रणाली में नाम और खाता संख्या का मेल नहीं किया जाता है तो करदाताओं की शिकायतों में और ज्यादा बढ़ोतरी हो सकती है।’ उन्होंने कहा कि सीबीडीटी इस समस्या का विश्लेषण कर रहा है, और इसमें कुछ बदलाव किए जाने के बारे में सोचा जा रहा है।
नई प्रणाली होगी ज्यादा सुरक्षित
कपूर ने कहा, ‘अब हम ऐसी प्रणली के तहत काम करने का प्रयास कर रहे हैं कि जब करदाता अपना बैंक खाता देगा तो हम पहले उसे बैंक से मेल करा कर देखेंगे। इस प्रकार, हम एक कदम आगे बढ़ रहे हैं। एक बार यह तय हो जाने के बाद कि करदाता का खाता संख्या और नाम बैंक में एकसमान है, हम सभी रिफंड ऑटोमेटिक तरीके से बैंक खाते में भेजने में सक्षम होंगे। फिर, स्पीड पोस्ट से चेक भेजने का झंझट नहीं रह जाएगा।’