सेबी के एमएफ रेगुलेशन 1996 के तहत म्यूचुअल फंड्स को इनवेस्टर्स की अपनी मौजूदा म्यूचुअल फंड यूनिट्स ट्रांसफर करने की अनुमति दी गई है। हालांकि, फंड हाउसेज सभी यूनिट होल्डर्स को यूनिट ट्रांसफर करने की इजाजत नहीं देते हैं। यूनिट होल्डर की मृत्यु के मामलों में म्यूचुअल फंड हाउस यूनिट ट्रांसफर की सहूलियत देते हैं।
अगर किसी यूनिट होल्डर की मृत्यु हो जाती है और उस अकाउंट में कोई ज्वाइंट होल्डर (संयुक्त खाताधारक) नहीं होता है तो यूनिटें नॉमिनी (नामित व्यक्ति) को ट्रांसफर कर दी जाती हैं। यूनिटों के ट्रांसमिशन के लिए कई तरह के दस्तावेजों की जरूरत होती है। दस्तावेजों की जरूरत इस बात पर निर्भर करती है कि म्यूचुअल फंड अकाउंट्स में ज्वाइंट होल्डर है या नहीं। ज्वाइंट होल्डर न होने पर नॉमिनी के लिए अलग दस्तावेज लगते हैं।
यूनिट्स के ट्रांसमिशन के लिए ज्वाइंट होल्डर या नामित व्यक्ति (ज्वाइंट होल्डर न होने की स्थिति में) को एक पत्र देना होता है। साथ ही यूनिट धारक की मृत्यु का प्रमाण पत्र, अपना नो योर क्लाइंट (केवाईसी) सर्टिफिकेट, अपने बैंक अकाउंट के रजिस्ट्रेशन के लिए अपना बैंक अकाउंट मैंडेट भी देना होता है।
अगर ज्वाइंट अकाउंट होल्डर जीवित हो तो यूनिट ट्रांसमिशन के लिए किसी तरह के कानूनी दस्तावेजों की जरूरत नहीं पड़ती है। लेकिन नॉमिनी या नामित व्यक्ति को फंड हाउस को कुछ कानूनी दस्तावेज भी देने होंगे। अगर निवेश 1 लाख रुपये से ज्यादा का है तो नॉमिनी को इंडेमनिटी बॉन्ड और कानूनी वारिस होने का एफिडेविट देना पड़ सकता है।
ये सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद यूनिट्स का ट्रांसमिशन एक हफ्ते से 10 दिन में पूरा हो जाता है। इसलिए जब भी आप म्यूचुअल फंड यूनिट्स खरीदें तो उसमें नॉमिनी का उल्लेख जरूर करें और उससे संबंधित दस्तावेज जरूर जमा कर दें।