पोंजी स्कीम के जरिये लोगों से पैसा इकट्ठा कराने वाली कंपनियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार इन पर नकेल कसने की तैयारी में है। सरकार की एक समिति ने मल्टी लेवल मार्केटिंग जैसे बिजनेस करने वाली कंपनियों का नियमन करने वाले नियमों में व्यापक पैमाने पर बदलाव की सिफारिश की है। इसके साथ ही समिति ने डिफाल्टर कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने और विदेशों से संचालित हो रही उनकी वेबसाइट पर पाबंदी लगाने की भी सलाह दी है।
पोंजी स्कीम के जरिये बढ़ती ठगी की घटनाओं को देखते हुए इस मामले की पड़ताल के लिए गठित अंतर मंत्रालयी समिति ने कहा है कि मल्टी लेवल मार्केटिंग योजनाओं पर नजर रखने के लिए एक केंद्रीय एजेंसी होनी चाहिए। इसके साथ ही समिति ने वित्त मंत्रालय को बाजार नियामक सेबी और अन्य मंत्रालयों व एजेंसियों के साथ मिलकर ऐसी कंपनियों के लिए नए सिरे से दिशानिर्देश जारी करने की भी सलाह दी है। समिति में रिजर्व बैंक, उपभोक्ता मामले, कारपोरेट मामले, वित्त और कानून मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल हैं।
समिति ने सिफारिश की है कि स्पीक एशिया सरीखे ऑनलाइन कंपनियों पर उपभोक्ताओं द्वारा शिकायत किए बिना ही कार्रवाई की जा सकती है। देश के बाहर से संचालित हो रही वेबसाइट पर लगाम लगाने और गेटवे में फिल्टर लगाने की आवश्यकता है। इस संबंध में सूचना प्रौद्योगिकी विभाग आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश जारी कर सकता है।