निवेश के अर्थशास्त्र का पहला और सबसे महत्वपूर्ण मंत्र है बचत। इसके लिए हर व्यक्ति को अपने आय-व्यय का एक व्यवस्थित तरीका विकसित करना चाहिए।
पैसे कमाना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उसका सही इस्तेमाल और खर्च का उचित प्रबंधन भी जरूरी है। यदि आय-व्यय प्रबंधन को सही तरीके से किया जाए, तो बचत आसानी से की जा सकती है।
बात जब खर्चों के प्रबंधन की आती है, तो उसमें सबसे महत्वपूर्ण होता है अपने खर्च का ब्योरा रखना। यह खर्च को नियंत्रित रखने में भी मददगार साबित होता है। बचत करने के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह उठता है कि इस रकम का निवेश किस तरह के उत्पादों में किया जाए।
इस बारे में मोटी बात यह जान लें कि व्यक्ति की कमाई, उसके परिवार का स्वरूप, उसकी उम्र आदि बातों से निवेश के तरीके तय होते हैं। निवेश के लक्ष्य और व्यक्ति की कमाई के बीच तालमेल करते हुए फाइनेंशियल एडवाइजर लोगों के सामने निवेश के विकल्प रखते हैं।
बच्चों की पढ़ाई और शादी-ब्याह के लिए कमोबेश समय तय होता है। इसलिए इसके निमित्त किए गए निवेश इसी लक्ष्य के अनुसार तय होते हैं। लंबी अवधि के लिए किए गए छोटे-छोटे रेगुलर निवेश इसमें बेहतर परिणाम देते हैं।
निवेश में कुछ और बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है, जैसे कि अधिकांश लोग बीमा पॉलिसी को निवेश समझने की भूल कर बैठते हैं, जबकि बीमा निवेश न होकर सुरक्षा कवच है। इसलिए बीमा कराते वक्त रिटर्न और बीमे वाली दोहरी योजना की जगह शुद्ध बीमा उत्पाद में निवेश करना चाहिए।
इस तरह के निवेश में आयकर का लाभ उठाने से भी नहीं चूकना चाहिए। हालांकि ऐसा भी न हो कि आप सिर्फ आयकर में छूट पाने के लिए इस तरह के उत्पाद खरीदें।
एक अच्छा निवेशक खुद को कर्ज के जाल से बचा कर रखता है। इसके लिए यह समझ लेना जरूरी है कि क्रेडिट कार्ड का स्मार्ट इस्तेमाल तो करें, पर उसके कर्ज जाल में फंस न जाएं।
पैसा कितने सालों में होगा दोगुना
यह सवाल हमेशा ही निवेशकों के मन में उठता है कि निवेश किया गया पैसा कितने समय के बाद दोगुना हो जाएगा। रकम दोगुना होने के अंदाजे के लिए एक गणना का सहारा लिया जा सकता है। यह गणना 72 आधारित है।
मान लीजिए कि आपको 12 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा तो आप 72 में 12 से भाग दीजिए। ऐसा करने पर उत्तर 6 आएगा। इसका अर्थ यह हुआ कि आपकी रकम करीब 6 साल में दोगुनी हो जाएगी। हालांकि इस गणना का उपयोग सिर्फ अंदाजा लगाने के लिए करना चाहिए।