बाजार में म्यूचुअल फंड की भरमार है। जिस तरह से आम निवेशक के लिए शेयर बाजार में शेयरों के जरिए निवेश करना बहुत आसान नहीं है, कुछ उसी तरह की स्थितियां म्यूचुअल फंड के निवेश में भी आ गई हैं।
ऐसे में विशेषज्ञों की सलाह जरूरी है, साथ ही विभिन्न माध्यमों से इनका अध्ययन भी आम निवेशकों के लिए फायदेमंद हो सकता है। शेयरों की तरह म्यूचुअल फंड में भी सुनी-सुनाई जानकारी के आधार पर निवेश से बचना चाहिए।
कब निकलें म्यूचुअल फंड स्कीम से बाहर
जिस तरह म्यूचुअल फंड स्कीम का चुनाव करना मुश्किल होता है, उसी तरह म्यूचुअल फंड स्कीम से बाहर निकलने का उचित समय चुनना भी कठिन होता है।
अमूमन यह मुश्किलें स्कीम का प्रदर्शन जरूरत से अधिक बेहतर होने या औसत से खराब होने की स्थिति में सामने आती हैं। यदि कुछ बातों का ध्यान रखा जाए, तो हम यह आसानी से जान सकेंगे कि म्यूचुअल फंड स्कीम से बाहर निकलने का सही समय क्या है।
फंड मैनेजर से जुड़ा होता है म्यूचुअल फंड
म्यूचुअल फंड में निवेश से पहले अपने फंड मैनेजर को अच्छी तरह से जान लें। मैनेजर ही सही समय पर सही शेयर चुनकर पोर्टफोलियो को मजबूत बनाते हैं और भारी मुनाफा दिलाते हैं।
ऐसे में फंड मैनेजर का महत्व बढ़ जाता है। लेकिन यदि फंड मैनेजर आपके फंड को छोड़ देता है, तो आप भी फंड से निवेश बाहर निकाल लें।
तीन साल तक न मिले जोखिम मुक्त रिटर्न
म्यूचुअल फंड के प्रदर्शन को आंकने के लिए लांग टर्म का नजरिया अपनाना चाहिए, लेकिन फिर भी तीन साल का समय स्कीम के प्रदर्शन को जांचने के लिए पर्याप्त है। अगर आप जितना जोखिम उठा रहे हैं उतना रिटर्न हासिल नहीं कर पा रहे हैं, तो स्कीम से बाहर निकल जाना बेहतर है।
बेंचमार्क इंडेक्स की तुलना में कम रिटर्न
हर म्यूचुअल फंड का एक बेंचमार्क इंडेक्स होता है। यह फंड का प्रदर्शन समझने में मदद करता है। आदर्श रूप में एक फंड को अपने इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन करना चाहिए। अगर स्कीम बेंचमार्क से बेहतर रिटर्न दे रही है लेकिन जोखिम मुक्त रिटर्न नहीं दे रही है, तो आप इस फंड को तीन साल का समय दे सकते हैं।