अगर आप भी अपना घर खरीदने की योजना बना रहे हैं और इसके लिए लोन लेने का विचार कर रहे हैं, तो ये खबर आपके लिए लाभदायक साबित हो सकती है। होम लोन लेने के बाद ग्राहक बैंक में जो रकम चुकाते हैं, उसमें ब्याज दर और मूलधन शामिल होता है, जिसे ईक्वल मंथली इंस्टॉलमेंट या इएमआई कहा जाता है। लोन के ब्याज दर के लिए आप फिक्स्ड रेट और फ्लोटिंग रेट के बीच चयन कर सकते हैं।
क्या है फिक्स्ड व फ्लोटिंग रेट?
फिक्स्ड रेट होम लोन पर पूरे लोन की अवधि के लिए आपकी ईएमआई बदलती नहीं है। यह लाभकारी साबित हो सकता है क्योंकि आगे चलकर ब्याज दरों के बढ़ने का संभावना हो सकती है। वहीं फ्लोटिंग रेट में बेस रेट के साथ फ्लोटिंग रेट के आधार पर आपके होम लोन की ब्याज दर तय की जाती है। ऐसे में बेस रेट के उतार-चढ़ाव का असर ईएमआई पर पड़ता है। यह तब लाभकारी होता है जब भविष्य में ब्याज दरें नीचे आने की उम्मीद हो।
फिक्स्ड रेट में बैंक शुरुआत में ही लोन की ब्याज दर तय कर देते हैं। यह दर लोन की पूरी अवधि के लिए लागू रहती है। लोन लेते समय ही पता चल जाता है कि आपको हर महीने कितने रुपये की किस्त चुकानी होगी। अगर आने वाले सालों में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रेपो रेट में बढ़ोतरी करता है, तो ही फिक्स्ड रेट होम लोन फायदेमंद साबित हो सकता है।
मिश्रित दरें भी ऑफर करते हैं बैंक
पूरी अवधि के लिए फिक्स्ड रेट पर कुछ ही बैंक या एनबीएफसी होम लोन देते हैं। कुछ बैंकों को छोड़कर अधिकांश बैंक पूरी अवधि के लिए मिश्रित दरों (फिक्स्ड और फ्लोटिंग) पर होम लोन ऑफर करते हैं। ये बैंक कुछ वर्षों के लिए फिक्स्ड दरों पर होम लोन प्रदान करते हैं। इसके बाद आपको संशोधित ब्याज दरों के हिसाब से किस्तें चुकानी होती है।
समय पर ईएमआई का भुगतान करने के लिए क्या करना चाहिए?
समय पर ईएमआई का भुगतान करने के लिए आपको बचत कर इमरजेंसी फंड के तौर पर अपने पास राशि रखनी चाहिए। आर्थिक संकट से जूझने में ये फंड आपकी मदद कर सकता है। अगर आपके जीवन में कुछ बुरा हो जाता है, जैसे अगर आपकी नौकरी छूट जाती है, या आप बीमार हो जाते हैं, तो ये फंड आपके काम आ सकता है। इससे आपकी लोन चुकाने की क्षमता प्रभावित नहीं होगी।