उच्च महंगाई दर, ऊंची ब्याज दरें, अस्थिर वैश्विक माहौल जैसी तमाम चुनौतियों के बावजूद 2012 वित्तीय बाजारों और निवेशकों के लिए अच्छा रहा। नीतिगत स्तर पर व्याप्त जड़ता को दूर करने के लिए सरकार की ओर से की गई पहल और बजटीय उपायों का सकारात्मक असर म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री पर भी दिखाई दिया।
इससे 2013 के लिए एक बेहतर आधार तैयार हुआ है। इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिहाज से देखें, तो 2012 एक बेहतर वर्ष साबित हुआ और इक्विटी डायवर्सिफाइड फंड ने निवेशकों को 25 फीसदी से अधिक का रिटर्न दिया।
वित्तीय बाजारों में माहौल बेहतर हुआ है। सरकारी और नियामकीय स्तर पर किए गए तमाम उपायों के साथ-साथ वैश्विक हालात में सुधार होने से म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए 2013 की शुरुआत अच्छी हुई है। अर्थव्यवस्था में सुधार के ठोस संकेत मिलने से आगे इसका प्रदर्शन और बेहतर होने की उम्मीद है।
पिछले करीब दो साल से ऊंची ब्याज दरों ने उद्योगों को काफी परेशान किया है। अब ब्याज दरों में दिखी नरमी ने काफी राहत दी है। निश्चित रूप से ब्याज दरों में कमी से कंपनियों को अपना मुनाफा बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे इस साल इक्विटी बाजार में निवेश बढ़ने का अच्छा अवसर तैयार होगा।
इक्विटी बाजार में निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे लौटना निश्चित रूप से एक बेहतर संकेत है। हालांकि, अधिकांश निवेशक इक्विटी में सीधे निवेश की बजाय म्यूचुअल फंड स्कीमों के जरिए निवेश को अधिक बेहतर और अच्छा रिटर्न देने वाला मान रहे हैं।
हाल के दिनों में बाजार के उतार-चढ़ाव भरे रुख को देखते हुए इस धारणा को और बल मिला है और विभिन्न इंडेक्सों पर इक्विटी स्कीमों का प्रदर्शन काफी अच्छा साबित हुआ है।
दूसरी ओर, म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को लेकर हाल में हुए बदलावों की बात करें, तो आम बजट से इंडस्ट्री को कई अच्छी खबरें मिली हैं। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिशें बजट में दिखाई दीं। सरकार ने भरोसा जताया है कि आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने के साथ-साथ छोटे निवेशकों का जोर इक्विटी बाजार की ओर बढ़ेगा।
इसी दिशा में सरकार ने राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम (आरजीईएसएस) का विस्तार कर म्यूचुअल फंड में निवेश बढ़ाने की ठोस पहल की है। सरकार का फोकस इंडस्ट्री के लिए अच्छा माहौल विकसित करने का है। इसी को देखते हुए इस बार के बजट में आरजीईएसएस का विस्तार तीन साल के लिए किया गया।
साथ ही साथ स्पष्ट तौर यह प्रावधान किया गया कि म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर स्टॉक एक्सचेंज के सदस्य के रूप में कार्य कर सकेंगे। वहीं, बजट में म्यूचुअल फंड के जरिए कॉरपोरेट बांड मार्केट तैयार करने की विशेष पहल की गई।
इसके अलावा, वित्त विधेयक में पास थ्रू सर्टिफिकेट (पीटीसी) को लेकर फैली भ्रम की स्थिति भी साफ हो गई। यानी, अब म्यूचुअल फंड हाउस भी पीटीसी इश्यू में निवेश करने की स्थिति में होंगे।
कुल मिलाकर देखा जाए तो कमाई और खर्चों में संतुलन बनाने की दृष्टि से पेश किया गया बजट अर्थव्यवस्था को तेजी देने के साथ-साथ इक्विटी बाजार में निवेशकों को भरोसा मजबूत करने वाला भी है। निश्चित रूप से आने वाले दिनों में इसका म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री पर सकारात्मक असर पड़ेगा और इसका विस्तार होगा।
लांग टर्म का नजरिया बेहतर
म्यूचुअल फंड में निवेश की अवधि का चयन करने को लेकर निवेशक काफी असमंजस की स्थिति में रहते हैं। खासकर इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश की बात हो, तो कन्फ्यूजन अधिक रहता है। हालांकि, यदि थोड़ा बहुत गहराई से सोच विचार किया जाए, तो इस समस्या का भी आसानी से हल हो जाएगा।
सामान्य रूप से जब भी आपके पास उपयुक्त लांग टर्म निवेश की रणनीति हो, तो वही समय म्यूचुअल फंड में निवेश करने का उचित समय होता है। म्यूचुअल फंड में निवेश का नजरिया शार्ट टर्म का रखना अधिक लाभकारी नहीं रहता है।
कुल मिलाकर कहा जाए तो जब भी आप म्यूचुअल फंड में निवेश का विकल्प चुने, उसके लिए एक निश्चित अवधि पहले ही निर्धारित कर लें। इसका सबसे अधिक लाभ बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति में जोखिम को नियंत्रित करने और समायोजित रिटर्न हासिल करने में होता है।