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चिंता मनी-48 : रिवर्स मॉर्गेज क्या होता है, इसे कैसे बना सकते हैं बुढ़ापे का सहारा?

Wed, 07 Oct 2020 02:36 AM IST
योगेश साहू नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार
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महेश प्रकाश रुड़की में अपने घर में शांति से रहते हैं और 65 की उम्र में वे पेंशन और अपने मासिक खर्चों का ध्यान रखते हुए स्वस्थ एवं प्रसन्न हैं। उनके पास पर्याप्त बचत है, लेकिन जीवन के शेष वर्षों के लिए वह विकल्प के रूप में अपने घर के मूल्य का उपयोग करने के लिए रिवर्स मॉर्गेज अपनाना चाहते हैं।

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किसी भी अन्य मध्यमवर्गीय भारतीय की तरह महेश प्रकाश अपनी कमाई के वर्षों में बचत करते थे। वह सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में काम करते थे और वहां से 2015 में डीजीएम के रूप में सेवानिवृत्त हुए। उनके दो बच्चे विदेश में अच्छी तरह से बसे हुए हैं, जिनके पास वह हर साल चार से छह महीनों के लिए जाते हैं।

उन्हें नहीं लगता कि वह कभी अपने बच्चों के साथ रहने के लिए अपना घर छोड़ पाएंगे और वह जीवन के अंत तक अपने घर में रहना चाहते हैं। साथ ही वह चाहते हैं कि उनकी मृत्यु के बाद उनके घर का बंदोबस्त हो जाए। वह रिवर्स मॉर्गेज के बारे में सोच रहे हैं और इसके बारे में ज्यादा जानना चाहते हैं।
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संपत्ति से मुक्ति
अधिकांश भारतीय अपने जीवनकाल में एक घर बना पाते हैं और कई के लिए यह उनकी सबसे बड़ी वित्तीय संपत्ति होती है। बहुत से बुजुर्ग मूल्यवान संपत्ति के बावजूद खुद को कठिन वित्तीय स्थिति में पाते हैं। घर बेचना आसान नहीं होता और कई बार लोग अपने घर से इतने भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं कि वे बुढ़ापे में अपने जीवन-स्तर के साथ समझौता करने को तैयार होते हैं, पर अपने घरों को छोड़ना नहीं चाहते हैं।

रिवर्स मॉर्गेज की अवधारणा...

रिवर्स मॉर्गेज की अवधारणा पहली बार सरकार ने 2007-08 के केंद्रीय बजट में पेश की थी। सीधे शब्दों में कहें, तो रिवर्स मॉर्गेज आवास ऋण के बिल्कुल विपरीत है। एक नियमित आवासीय ऋण के विपरीत (जिसमें आप ऋण लेकर एक घर खरीदते हैं और घर के स्वामित्व से पहले पूरी तरह से ऋण की पूरी अवधि तक ईएमआई का भुगतान करते हैं) रिवर्स मॉर्गेज के मामले में वरिष्ठ नागरिक, जो एक घर या संपत्ति के मालिक हैं।

लेकिन उनके पास आय के नियमित स्रोत का अभाव है, वे अपनी संपत्ति को ईएमआई की तरह धन के नियमित प्रवाह के लिए रिवर्स मॉर्गेज ऋण देने वाली वित्तीय संस्था के पास गिरवी रख सकते हैं। ध्यान रखें कि वित्तीय संस्था को रिवर्स मॉर्गेज का विकल्प अपनाने वाले वरिष्ठ नागरिक की मृत्यु के बाद संपत्ति को बेचने का अधिकार होता है, इस योजना के तहत कोई भी बकाया अतिरिक्त धन उसे बुजुर्ग के कानूनी उत्तराधिकारियों को भुगतान करना पड़ता है।

अन्य किसी भी ऋण की तरह इस ऋण को चुनते समय भी प्रोसेसिंग फी एवं अन्य शुल्क लागू होते हैं। रिवर्स मॉर्गेज कई प्रकार के होते हैं, जिसमें एक निश्चित अवधि तक नियमित रूप से भुगतान करने वाले होते हैं और कुछ ऐसे भी होते हैं, जो घर के स्वामी की मृत्यु से जुड़े होते हैं।

इसलिए बीस साल के नियमित रिवर्स मॉर्गेज के मामले में यह बीस साल में खत्म हो जाता है, चाहे घर का मालिक जीवित रहे अथवा नहीं और संपत्ति स्वतः कर्जदाता को हस्तांतरित हो जाती है। वार्षिक भुगतान करने वाले रिवर्स मॉर्गेज में संपत्ति का  हस्तांतरण घर के मालिक के निधन के बाद ही होता है।
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वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक आदर्श विकल्प

रिवर्स मॉर्गेज उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक आदर्श विकल्प है, जिन्हें किसी दूसरे पर निर्भर रहे बिना अपनी पेंशन के पूरक के रूप में नियमित आय की आवश्यकता होती है। यह उन लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है, जो अपने जीवन काल में घर के वित्तीय मूल्य का उपयोग करना चाहते हैं। सुविधा के बावजूद रिवर्स मॉर्गेज बहुत लोकप्रिय नहीं है और इस तरह का ऋण देने वाले संस्थान कम हैं।

समृद्ध वरिष्ठ नागरिक, विशेष रूप से महेश प्रकाश जैसे लोग इस योजना का विकल्प चुनकर एक उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं। मालिक की तरह वह अपनी मर्जी से अपने घर में रहने का आनंद ले सकते हैं और अपने जीवन के बाद अपने बच्चों को संपत्ति का वित्तीय मूल्य भी हस्तांतरित कर सकते हैं। चूंकि उनके बच्चों के भारत लौटने और रुड़की में बसने की संभावना नहीं है; अपने घर को किराये पर देने और ऐसा कोई अन्य विकल्प अपनाने से बेहतर है कि वह उसका वित्तीय उपयोग करें।
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