साहिल बिष्ट और उनकी पत्नी नेहा अगले साल की शुरुआत में अपनी पहली संतान की उम्मीद कर रहे हैं। महामारी के कारण वे अपने होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। बच्चे के जन्म के समय की अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर भी वे आशंकित हैं। साहिल पत्नी के साथ नैनीताल में रहते हैं। वह विश्वविद्यालय में प्राध्यापक हैं, जबकि उनकी पत्नी घर पर ऊंची कक्षाओं के छात्रों को ट्यूशन पढ़ाती हैं।
कोरोना के कारण बच्चे के पालन-पोषण में होने वाले खर्च को लेकर वे चिंतित हैं। उन्होंने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से सुना है कि बच्चे के जन्म के बाद खर्च अचानक बहुत बढ़ जाता है, इसलिए वे वित्तीय प्रबंधन के रास्ते तलाश रहे हैं। यह ध्यान में रखना होगा कि अगले 20-22 साल तक आपको बच्चे पर खर्च करना होगा, जब तक कि वह ग्रेजुएट होकर खुद कमाने न लग जाए।
स्कूल जाने से पहले
पैदा होने से स्कूल जाने से पहले तक बच्चा बहुत तेजी से बढ़ता है। ऐसे में, आपको डॉक्टर की विजिट, बच्चे के पैदा होने, जन्म के बाद के संस्कार, टीकाकरण, बच्चे की देखभाल के लिए नर्स या मेड रखने आदि के तमाम खर्च अलग करके रख देने चाहिए।
यह सारा खर्च बहुत अधिक होगा। लेकिन अगर आप पहले से योजना बनाते हैं, तो पैसे का प्रबंध कर सकते हैं। यह उम्मीद करते हुए, कि गर्भावस्था में पत्नी को, और पैदा होने के बाद नवजात शिशु को कोई गंभीर समस्या नहीं होगी, दो साल तक बच्चे की देखभाल के लिए दो लाख रुपये अलग से रख दीजिए।
यह खर्च का एक सामान्य आकलन है, जबकि बहुत-से ऐसे खर्च हैं, जो आपकी इच्छा से घट-बढ़ सकते हैं। जैसे, निजी अस्पताल में बच्चे की डिलिवरी पर खर्च एक लाख रुपये तक हो सकता है, जबकि सरकारी अस्पताल में यह खर्च 10,000 या इससे भी कम होगा।
बच्चे के जन्म के बाद होने वाले अनुष्ठानों में भी कम या ज्यादा खर्च कर सकते हैं। पहले बच्चे के जन्म के बाद बिना सोचे ही बहुत सारे खिलौने और बच्चे की सहूलियतों से जुड़ी चीजें खरीद ली जाती हैं। बच्चे के कपड़े और उसे घुमाने के लिए प्रैम (पेराम्ब्यूलेटर- बच्चों को घुमाने वाली गाड़ी) उपयोग के हिसाब से ही खरीदे जाने चाहिए।
अगर आपके दोस्तों के बच्चे थोड़े बड़े हैं, तो अपने बच्चे के लिए उनके इस्तेमाल किए हुए कपड़े लिए जा सकते हैं। अपने बच्चे का पहला जन्मदिन भी आप धूमधाम से मनाना चाहेंगे, लेकिन उसके खर्च को भी ध्यान में रखना होगा।