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चिंता मनी-49 : स्कूल में पढ़ रहे अपने बच्चे के लिए वित्तीय योजना कैसे बनाएं?

Thu, 08 Oct 2020 02:07 AM IST
योगेश साहू नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार
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school - फोटो : school
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साहिल बिष्ट और उनकी पत्नी नेहा अगले साल की शुरुआत में अपनी पहली संतान की उम्मीद कर रहे हैं। महामारी के कारण वे अपने होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। बच्चे के जन्म के समय की अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर भी वे आशंकित हैं। साहिल पत्नी के साथ नैनीताल में रहते हैं। वह विश्वविद्यालय में प्राध्यापक हैं, जबकि उनकी पत्नी घर पर ऊंची कक्षाओं के छात्रों को ट्यूशन पढ़ाती हैं।

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कोरोना के कारण बच्चे के पालन-पोषण में होने वाले खर्च को लेकर वे चिंतित हैं। उन्होंने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से सुना है कि बच्चे के जन्म के बाद खर्च अचानक बहुत बढ़ जाता है, इसलिए वे वित्तीय प्रबंधन के रास्ते तलाश रहे हैं। यह ध्यान में रखना होगा कि अगले 20-22 साल तक आपको बच्चे पर खर्च करना होगा, जब तक कि वह ग्रेजुएट होकर खुद कमाने न लग जाए।

स्कूल जाने से पहले
पैदा होने से स्कूल जाने से पहले तक बच्चा बहुत तेजी से बढ़ता है। ऐसे में, आपको डॉक्टर की विजिट, बच्चे के पैदा होने, जन्म के बाद के संस्कार, टीकाकरण, बच्चे की देखभाल के लिए नर्स या मेड रखने आदि के तमाम खर्च अलग करके रख देने चाहिए।
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यह सारा खर्च बहुत अधिक होगा। लेकिन अगर आप पहले से योजना बनाते हैं, तो पैसे का प्रबंध कर सकते हैं। यह उम्मीद करते हुए, कि गर्भावस्था में पत्नी को, और पैदा होने के बाद नवजात शिशु को कोई गंभीर समस्या नहीं होगी, दो साल तक बच्चे की देखभाल के लिए दो लाख रुपये अलग से रख दीजिए।

यह खर्च का एक सामान्य आकलन है, जबकि बहुत-से ऐसे खर्च हैं, जो आपकी इच्छा से घट-बढ़ सकते हैं। जैसे, निजी अस्पताल में बच्चे की डिलिवरी पर खर्च एक लाख रुपये तक हो सकता है, जबकि सरकारी अस्पताल में यह खर्च 10,000 या इससे भी कम होगा।

बच्चे के जन्म के बाद होने वाले अनुष्ठानों में भी कम या ज्यादा खर्च कर सकते हैं। पहले बच्चे के जन्म के बाद बिना सोचे ही बहुत सारे खिलौने और बच्चे की सहूलियतों से जुड़ी चीजें खरीद ली जाती हैं। बच्चे के कपड़े और उसे घुमाने के लिए प्रैम (पेराम्ब्यूलेटर- बच्चों को घुमाने वाली गाड़ी) उपयोग के हिसाब से ही खरीदे जाने चाहिए।

अगर आपके दोस्तों के बच्चे थोड़े बड़े हैं, तो अपने बच्चे के लिए उनके इस्तेमाल किए हुए कपड़े लिए जा सकते हैं। अपने बच्चे का पहला जन्मदिन भी आप धूमधाम से मनाना चाहेंगे, लेकिन उसके खर्च को भी ध्यान में रखना होगा।

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स्कूल का खर्च

तीन से चार साल की उम्र में बच्चे का स्कूल में दाखिला कराना पड़ता है, फिर अगले 14-15 साल तक उसकी शिक्षा, स्कूल यूनिफॉर्म तथा स्कूल में होने वाली एक्टिविटीज का खर्च उठाने के लिए तैयार रहना होगा। इसको ध्यान में रखते हुए कि बच्चा 11-12वीं में कौन-से विषय चुनता है, आपको उसकी कोचिंग का खर्च भी जोड़ना होगा।

बेशक यह जल्दबाजी हो सकती है, लेकिन उसकी उच्च शिक्षा के लिए भी धन का प्रबंधन एक अच्छा आइडिया होगा। भविष्य के खर्च का फंड तैयार करने के लिए आप एसआईपी वाले म्यूचुअल फंड्स के साथ चाइल्ड इंश्योरेंस पॉलिसी में भी निवेश कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, आज इंजीनियरिंग की डिग्री के चार साल का खर्च 20-30 लाख और तीन साल में साधारण ग्रेजुएशन का खर्च छह से आठ लाख रुपये है। अगर आपका बच्चा मेधावी है, तो उसका यह खर्च स्कॉलरशिप से निकल सकता है।

साहिल और नेहा को खर्च की चिंता में डूबने के बजाय बच्चे को बढ़ते हुए देखने के सुखद अनुभव का लाभ उठाना चाहिए। साथ ही, उन्हें यथार्थवादी होना चाहिए कि अपने बच्चे के लिए वे क्या कर सकते हैं और उसी दिशा में योजना बनानी चाहिए। घर में ऐसा माहौल बनाना चाहिए, जिससे बच्चा छोटी उम्र से ही पैसे का महत्व समझ सके। बचत की आदत डालनी चाहिए और जरूरी चीजों पर ही खर्च करना चाहिए।
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