लगातार छह महीनों की गिरावट के बाद अक्तूबर में एसआईपी के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश बढ़कर 7,800 करोड़ रुपये हो गया है। इससे पता चलता है कि खुदरा निवेशकों के लिए स्थितियां सामान्य हो रही हैं। सितंबर में यह आंकड़ा 7788 करोड़ रुपये का था। अगस्त में 7791 करोड़ रुपये, जुलाई में 7831 करोड़ रुपये, जून में 7917 करोड़ रुपये, मई में 8123 करोड़ रुपये, अप्रैल में 8376 करोड़ रुपये और मार्च में यह 8641 करोड़ रुपये था।
हालांकि शेयरखान के हेड (इन्वेस्टमेंट सॉल्यूशंस) गौतम कालिया ने कहा कि एसआईपी के जरिए निवेश में वृद्धि मुनाफा वसूली को प्रेरित कर सकती है, जैसा कि हम नवंबर के इक्विटी प्रवाह के प्रारंभिक आंकड़ों में देख रहे हैं। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एमफी) के आंकड़ों से पता चला कि उद्योग ने पिछले महीने एसआईपी मार्ग के माध्यम से 7,800 करोड़ रुपये जुटाए।
आठ महीनों में हुआ 55627 करोड़ का निवेश
यह इस साल मार्च के बाद एसआईपी के माध्यम से निवेश की किसी भी महीने की पहली वृद्धि है। इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष 2020-21 के पहले आठ महीनों में एसआईपी के माध्यम से निवेश 55,627 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
खुदरा निवेशकों का बढ़ेगा भरोसा
कालिया ने कहा कि, 'माह दर माह वृद्धि भले ही मामूली है, लेकिन यह बताता है कि खुदरा निवेशक सामान्य स्थिति की ओर लौट रहे हैं। शेयर बाजारों में हालिया तेजी से भी खुदरा निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और वे अपने निवेश पर बेहतर रिटर्न मिलता देखेंगे।'
म्यूचुअल फंड में 3.37 करोड़ से अधिक एसआईपी खाते
मालूम हो कि अक्तूबर में कुल 11.27 लाख एसआईपी रजिस्टर्ड हुए थे, जबकि 7.87 लाख बंद किए गए थे। यानी अक्तूबर के लिए नेट एडीशन 3.4 लाख रहा है। मौजूदा समय में म्यूचुअल फंड में 3.37 करोड़ से अधिक एसआईपी खाते हैं, जिसके माध्यम से निवेशक नियमित रूप से भारतीय म्यूचुअल फंड योजनाओं में निवेश करते हैं।