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‘सिटी ब्यूटीफुल’ में रीयल एस्टेट ही गोल्ड

Mon, 12 Nov 2012 08:21 PM IST
नई दिल्ली/चंडीगढ़/अरविंद वाजपेयी
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ट्राइसिटी में निवेश का नजरिया अब बदल गया है। परंपरागत बीमा पॉलिसियों और यूलिप में निवेश करने की परंपरा चली गई है और शेयर से भी लोग कट चुके हैं। अब लोगों का रुख हो गया है रीयल एस्टेट और सोने पर।
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ट्राइसिटी में एक ओर बैंकिंग स्कीम, शेयर, म्यूचुअल फंड के साथ अन्य बचत योजनाएं प्रतिमाह दस हजार करोड़ रुपये का कारोबार कर रही हैं, वहीं  रीयल एस्टेट की स्थिति जरा अलग है। यहां रीयल्टी कंपनियों की चांदी है। ट्राइसिटी में प्रतिदिन बीस हजार करोड़ रुपये का कारोबार अनुमानित है।

मनमीत बिल्डर्स एंड डेवलपर्स के जीएम सचिन वर्मा का कहना है कि रीयल एस्टेट अब कमाऊ पूत हो चुका है। प्रॉपर्टी में रुपया जितनी तेजी से बढ़ता उतनी तेजी के साथ कुछ भी नहीं बढ़ रहा। ऐसे में ट्राइसिटी और उसके निकटवर्ती इलाकों में लोगों की पहली पसंद प्रॉपर्टी है।
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रोजाना सौ फ्लैट की बुकिंग
जमुना अपार्टमेंट खरड़ के चेयरमैन ललित बंसल ने कहा कि ट्राइसिटी में प्रतिदिन के औसतन सौ फ्लैट बुक होते हैं। ज्यादातर लोग रहने के लिए नहीं, बल्कि किराये पर लगाने के लिए फ्लैट खरीद रहे हैं। रीयल्टी में निवेश की दर 20-25 फीसदी की दर से बढ़ा है। सिटी के बैंकों की बात करें तो बैंकों का बिजनेस बीस फीसदी बढ़ा है। वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बैंकों की आय में 20 हजार करोड़ से ज्यादा का ट्रांजेक्शन हुआ है। इसमें एफडी और अन्य स्कीमें शामिल हैं। पीएनबी के एक अधिकारी के अनुसार बैंकिंग बिजनेस में तेजी आ रही है, जिसकी वजह हैं बैंक के बढ़ते लोन।

डाकघर योजनाओं से दूर भाग रहे निवेशक
बैंकों की जमा दर में बढ़ोतरी होते ही निवेशकों ने डाक विभाग की योजनाओं से किनारा करना शुरू कर दिया है। डाक योजनाओं में पांच से सात फीसदी की मामूली वृद्धि ही दर्ज की गई है।

सोने-चांदी के निवेश में बढ़ी रुचि
सोना-चांदी अब लोगों के लिए निवेश का भी जरिया बन गया है। सराफा कारोबारियों की मानें, तो निवेश सोने में सीधे भी हो रहा है और गोल्ड फंड व ई-गोल्ड के रूप में भी। विक्सन सिक्योरिटी के प्रमुख वी कुमार ने कहा कि रीयल एस्टेट में निवेश के बाद यही वह सेग्मेंट है, जिसको शहर के आम निवेशक पसंद कर रहे हैं। गत वर्ष ट्राइसिटी में कुल मिलाकर दो हजार करोड़ रुपये का निवेश और खरीदारी हुई।
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