यदि आप अपनी बचत पर अधिक ब्याज कमाना चाहते हैं, तो फिलहाल सावधि जमा (एफडी) योजनाओं में निवेश भी एक अच्छा विकल्प है। नए साल से जमा योजनाओं के ब्याज में कमी आने की पूरी आशंका है। ऐसे में आपको अपनी जमा पर 0.25 फीसदी से लेकर 0.50 फीसदी तक कम ब्याज मिल सकता है। इसे देखते हुए जितनी जल्दी संभव हो बैंकों, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी), कॉरपोरेट एफडी आदि में निवेश कर अच्छा रिटर्न हासिल किया जा सकता है।
अक्तूबर में पेश हुई मौद्रिक नीति में भारतीय रिजर्व बैंक यह संकेत दे चुका है कि नए साल में महंगाई दर में कमी आने की संभावना है, जिसके बाद वह प्रमुख दरों में कमी करेगा। रिजर्व बैंक के अलावा सरकार का भी अर्थव्यवस्था के ग्रोथ पर जोर है, उसे देखते हुए रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कमी करने पर बैंक भी जमाओं की ब्याज में कमी करेंगे। इसका असर बैंक के साथ-साथ गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों द्वारा जमा योजनाओं पर दिए जाने वाले ब्याज पर पड़ेगा।
देश के प्रमुख बैंकों ने सितंबर से जमा दरों में कमी करना शुरू कर दिया है। भारतीय स्टेट बैंक सितंबर में 0.50 फीसदी तक ब्याज में कमी कर चुका है। इसी तरह, दूसरे बैंक भी सितंबर और अक्तूबर में जमा दरों में कमी कर चुके हैं। ऐसे में जमाओं पर ज्यादा ब्याज पाने का यह एक अच्छा अवसर है। कम अवधि में बैंकों की तुलना में 0.50 फीसदी से 1 फीसदी तक ज्यादा ब्याज पाने का अच्छा विकल्प गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां भी हैं।
यह कंपनियां आमतौर पर एक निश्चित राशि पर एक से पांच साल की अवधि की जमाएं लेती हैं, जिनकी ब्याज दरें बैंकों की तुलना में ज्यादा होती है। हालांकि, बैंकों की तुलना में इन कंपनियों में निवेश करना थोड़ा जोखिम भरा होता है। ऐसे में कंपनियों में निवेश करने से पहले कंपनी की साख, उसके उत्पाद की रेटिंग आदि के बारे में जानकारी जरूर प्राप्त कर लेनी चाहिए। देश में इस समय प्रमुख रूप से हाउसिंग फाइनेंस कंपनी एचडीएफसी, एलआईसी हाउसिंग, एसेट फाइनेंस कंपनी श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी लिमिटेड, महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंस कंपनी लिमिटेड आदि जमाएं ले रही हैं।
इनके अलावा, देश के प्रमुख कॉरपोरेट भी पूंजी जुटाने के लिए जमा योजनाएं पेश करते हैं। जोकि बैंक, एनबीएफसी की तुलना में अधिक ब्याज देते हैं। कंपनियां विज्ञापन के जरिए उपभोक्ताओं को इसकी सूचना देती हैं। ऐसी कंपनियों में निवेश करने के पहले यह देख लेना चाहिए की कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत है कि नहीं, वह शेयर बाजार में सूचीबद्ध है या नहीं, साथ ही उसकी स्कीम को प्रमुख रेटिंग एजेंसी से किस तरह की रेटिंग मिली है। इन सब बातों को ध्यान में रखकर ही निवेश करना चाहिए।
एफडी से आमदनी पर देना होता है टैक्स
एफडी के जरिए ब्याज से होने वाली आमदनी पर टैक्स का भुगतान करना होता है। यदि किसी वित्तवर्ष में ब्याज से आमदनी 10,000 रुपये से अधिक है, तो उसे करदाता की अन्य स्रोतों से हुई कुल आमदनी में जोड़ा जाता है और उस पर आयकर स्लैब के मुताबिक कर भुगतान करना होता है।
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि एफडी पर ब्याज से होने वाली आमदनी पर टैक्स की गणना संग्रहण आधार (अक्रूअल बेसिस) पर की जाती है न कि उस समय करदाता को प्राप्त वास्तविक रिटर्न के मुताबिक इसका आकलन होता है। एफडी कितने दिनों की है, इससे टैक्स देनदारी का सरोकार नहीं होता है। अगर कोई सेड्यूल बैंक में पांच साल के लिए एफडी कराए तो आयकर नियमों के अनुसार 80 सी के तहत डिडक्शन का लाभ मिलता है।