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अभी नहीं छूटी है रिटर्न भरने की आखिरी गाड़ी

Thu, 15 Aug 2013 01:07 AM IST
सुधीर कौशिक
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व्यक्तिगत आयकर दाताओं के लिए आयकर रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2013 थी, जिसे बढ़ाकर 5 अगस्त 2013 किया गया था।
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इसके बावजूद बहुत से लोग रिटर्न भरने से चूक गए हैं या रिटर्न भरने में कोई भूल कर बैठे हैं। ऐसे में उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। आयकर विभाग करदाताओं को पुराने और संशोधित रिटर्न भरने के मौके देता है। जरूरत है, नियमों की सही जानकारी और उनका पालन करने की।

यदि करदाता पर कोई टैक्स बकाया नहीं है, तो वह वित्त वर्ष 2012-13 का रिटर्न 31 मार्च 2014 तक बिना किसी पेनाल्टी या लेट फीस के जमा कर सकता है।

1-प्रदीप देशवाल नोएडा की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करते हैं। उन्हें मिलने वाले वेतन पर कंपनी द्वारा टीडीएस काटा जाता है, इसलिए उन्होंने सोचा कि जब पूरा टैक्स काटा जा चुका है, तो फिर आयकर रिटर्न भरने की क्या जरूरत। वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए आयकर रिटर्न भरने की आखिरी तारीख गुजर चुकी है और अब देशवाल अपनी भूल सुधारना चाहते हैं।
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2-नवीन गर्ग एक सरकारी कर्मचारी हैं। इस साल उन्हें टीडीएस कटौती का फॉर्म 16 काफी देर से मिला, जिसकी वजह से वह अपना आयकर रिटर्न जमा नहीं करा पाए हैं। उनकी भी यही दुविधा है कि आखिरी तारीख निकलने के बाद रिटर्न भरने का मौका कैसे मिलेगा।

3-नरेश रावत ने ई-फाइलिंग के जरिए अपना रिटर्न खुद भरने की कोशिश की, जिसमें कुछ कमियां रह गई हैं। रिटर्न भरने की आखिरी तारीख गुजरने के बाद क्या उन्हें अपनी भूल सुधारने का मौका मिलेगा।

प्रदीप, नवीन और नरेश जैसे हजारों ऐसे करदाता हैं, जो किसी न किसी कारणों से वित्त वर्ष 2012-13 के लिए अपना आयकर रिटर्न भरने से चूक गए या उसमें कुछ त्रुटि कर बैठे हैं। ऐसे करदाताओं को घबराने या परेशान होने की जरूरत नहीं हैं। सबसे पहले ऐसे करदाताओं को यह जान लेना चाहिए कि पुराना या संशोधित रिटर्न भरने के लिए वह कौन-सी श्रेणी के अंतर्गत आते हैं।

रिटर्न बाकी, टैक्स जमा
आपका पूरा टैक्स टीडीएस अथवा एडवांस टैक्स के तौर पर अदा हो चुका है और आप पर कोई टैक्स बकाया नहीं है। ऐसी स्थिति में आप वित्त वर्ष 2012-13 का रिटर्न 31 मार्च 2014 तक बिना किसी पेनाल्टी या लेट फीस के भर सकते हैं।

इस तरह पुराना रिटर्न 31 मार्च, 2015 तक जमा हो सकता है लेकिन 31 मार्च, 2014 के बाद रिटर्न भरने पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। इसलिए, अगर आपका टैक्स भरा जा चुका है और सिर्फ रिटर्न भरना बाकी है, तो अभी भी देर नहीं हुई है।

टैक्स भी बाकी और रिटर्न भी
अगर आपने आयकर का भुगतान नहीं किया है और रिटर्न भी भरने से रह गए हैं, तब भी आप आकलन वर्ष 2013-14 की आखिरी तारीख यानी 31 मार्च 2014 तक अपना रिटर्न भर सकते हैं। लेकिन, ऐसे मामलों में बकाया टैक्स पर प्रति माह 1 फीसदी ब्याज और रिटर्न देर से जमा करने पर एक फीसदी पेनाल्टी भरनी पडे़गी।

उदाहरण के तौर पर, अगर आप पर वित्त वर्ष 2012-13 का 10 हजार रुपये टैक्स बकाया है और 31 जुलाई से पहले रिटर्न भरने के बजाय नवंबर, 2013 में रिटर्न भरते हैं, तो पेनाल्टी के तौर पर 400 रुपये देने पड़ेंगे। यानी आप जितनी देर करेंगे, उतनी ज्यादा पेनाल्टी देनी पड़ेगी।

रिटर्न समय पर भरा, लेकिन भरने में चूक हो गई
अगर आपने समय पर अपना आयकर रिटर्न जमा किया है लेकिन उसमें कोई गलती हो गई है, तो इस कमी को दूर किया जा सकता है।

पहली कोशिश तो यही होनी चाहिए कि रिटर्न पूरी सावधानी से भरा जाए। लेकिन अगर भूलवश कोई त्रुटि रह गई है, तो इसे रिवाइज्ड या संशोधित रिटर्न के जरिए दूर किया जा सकता है। अगर रिटर्न ई-फाइल किया गया है, तो ऑनलाइन ही संशोधित रिटर्न भरा जा सकता है। इसमें कोई पेनाल्टी या फीस नहीं लगती है।

टैक्स बाकी, क्या भर सकते हैं रिटर्न?
आयकर अदा किए बगैर रिटर्न भरने की व्यवस्था को सरकार ने इस साल से समाप्त कर दिया है। अब आप रिटर्न तभी भर सकते हैं जबकि पूरा टैक्स जमा हो चुका हो। जिन लोगों ने टैक्स दिए बगैर ई-रिटर्न भरने की कोशिश की है, उनके रिटर्न मान्य नहीं होंगे। ऐसे लोगों को पहले अपना टैक्स जमा करना चाहिए और उसके बाद रिटर्न फाइल करें।

समय पर फॉर्म 16 नहीं मिला, तो फॉर्म 26एएस देखें
प्रत्येक नियोक्ता की यह जिम्मेदारी है कि वह कर्मचारी को उसके वेतन पर कर कटौती का प्रमाण पत्र यानी फॉर्म 16 मुहैया कराए। अगर, किसी कारणवश नियोक्ता ने फॉर्म 16 देने में विलंब किया है, तब भी आपको आयकर रिटर्न समय पर भरना चाहिए। फार्म 16 के होने अथवा नहीं होने दोनों ही स्थितियों में आयकर विभाग की वेबसाइट से आपको फॉर्म 26एएस डाउनलोड कर देखना चाहिए कि आयकर विभाग में टीडीएस के जरिए आपसे कितनी रकम काटी जा चुकी है। इसी आधार पर फॉर्म 16 नहीं होने के बावजूद समय पर रिटर्न भर दिया जाना चाहिए।

यह जरूर याद रखें
- रिटर्न भरने की आखिरी तारीख गुजरने के बाद भरे गए आयकर रिटर्न को आप संशोधित नहीं कर सकते हैं।
- देर से भरे जाने वाले रिटर्न में धारा 80 के तहत मिलने वाली छूट का लाभ नहीं उठाया जा सकता है।
- जिन लोगों की नौकरी या अन्य स्रोत से सालाना आय 2 लाख रुपये से ज्यादा है, उनके लिए आयकर रिटर्न जमा करना जरूरी है। भले ही उन पर टैक्स छूट का लाभ लेने के बाद कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती हो।
- सालाना 5 लाख रुपये से ज्यादा करयोग्य आय वालों के लिए ई-रिटर्न फाइल करना अनिवार्य है।

रिटर्न के साथ ऑडिट रिपोर्ट भेजना अनिवार्य
कंपनियों और कारोबारियों (जिनका ऑडिट होता है) के लिए आयकर रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 30 सितंबर भी अब ज्यादा दूर नहीं है। इस साल इनके आयकर रिटर्न भरने के तरीकों और नियमों में कुछ फेरबदल हुए हैं, जिन्हें समझना बेहद जरूरी है।

कंपनियों के आयकर रिटर्न फार्म-6 और प्रोफेशनल व बिजनेसमैन के रिटर्न आईटीआर-4 के माध्यम से भरे जाएंगे। इनके लिए ई-फाइलिंग अनिवार्य है। लेकिन इस साल जो अहम बदलाव आया है, वह एसेट यानी परिसंपत्तियों की घोषणा के बारे में है।

जिन लोगों को प्रोफेशन या बिजनेस से सालाना 25 लाख रुपये से ज्यादा आय होती है, उन्हें रिटर्न में अपनी एसेट और देनदारियों की पूरी जानकारी देनी होगी। हालांकि, 25 लाख रुपये सालाना से ज्यादा कमाने वाले नौकरीपेशा लोगों से इस तरह की जानकारी नहीं मांगी गई है।

इन परिसंपत्तियों में अचल संपत्ति, वित्तीय संपत्तियां, रत्न व आभूषण आदि शामिल हो सकते हैं। यह जानने के लिए आईटीआर4 में अलग से एक सेक्शन जोड़ा गया है। सरकार वेल्थ टैक्स में मामूली संग्रह को देखते हुए परिसंपत्तियों से जुड़ी जानकारियां आयकर रिटर्न के जरिए जुटाने की कोशिश कर रही है इसलिए परिसंपत्तियों की सही जानकारी देना जरूरी है।

एक बड़ा बदलाव इस साल टैक्स ऑडिट रिपोर्ट से संबंधित है। बिजनेस से सालाना एक करोड़ रुपये और प्रोफेशन से 25 लाख रुपये से ज्यादा की प्राप्ति होने पर टैक्स ऑडिट कराना अनिवार्य है।

पिछले वर्ष तक कंपनियों व कारोबारियों के आयकर रिटर्न में इस टैक्स ऑडिट का सिर्फ उल्लेख किया जाता था, लेकिन अब पूरी टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करानी है। यह ऑडिट रिपोर्ट सीए के डिजिटल सिग्नेचर के साथ ऑनलाइन ही जमा होगी। चूंकि ऑडिट रिपोर्ट रिटर्न के साथ जाएगी, इसलिए रिटर्न भरने में सावधानी बरतें और रिटर्न के साथ इसे जरूर भेजें।

कुछ और बातों पर भी कंपनियों व कारोबारियों को ध्यान देने की जरूरत है। 20 हजार रुपये से ज्यादा का नकद भुगतान करने की छूट सरकार नहीं देती है। अगर ऐसे नकद भुगतान का विवरण आपने रिटर्न में दिया है, तो इसे प्रॉफिट में जोड़ा जा सकता है।
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टीडीएस जमा किए बगैर कंपनी ऐसे खर्चों का क्लेम नहीं ले सकती। कंपनी की वैधानिक जिम्मेदारियों जैसे पीएफ, ग्रेचुएटी और ईएसआईसी के मामले में भी खर्चों का क्लेम तब तक नहीं लिया जा सकता जब तक वास्तव में इनका भुगतान न किया जाए। सरकार ने अब कई खर्चों को सिर्फ प्रोविजनिंग के आधार पर स्वीकार करना बंद कर दिया है।

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