आयकर में 50 हजार रुपये तक की छूट की सौगात अगले बजट में मिल सकती है। आय कर में किस तरह से छूट दी जाए, इस बारे में केन्द्रीय वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने गुणा-भाग करना शुरू कर दिया है। ऐसा इसलिए ताकि राजस्व घाटा भी नहीं बढ़े और छूट की सीमा भी बढ़ जाए।
आम चुनाव 2014 के प्रचार के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा आय कर छूट की सीमा तीन लाख रुपये तक बढ़ाने की बात जोर शोर से उठायी गई थी। वित्त मंत्री अरुण जेटली भी आय कर में ज्यादा छूट देने के पक्षधर रहे हैं।
कई मौकों उन्होंने कहा है कि जब लोगों के हाथ में ज्यादा रकम रहेगी तो वह ज्यादा खर्च करेंगे। जब ज्यादा खर्च होेगा तो इससे अर्थव्यवस्था में गुणक प्रभाव पड़ेगा और कुछ रकम सरकार के पास भी अप्रत्यक्ष कर के रूप में वापस आएगी।
कैसे मिलेगी छूट, फैसला बाद में
वित्त मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि आय कर में छूट किस तरीके से दी जा सकती है, इस बारे में डिस्कशन का दौर शुरू हो गया है। इस बारे में अनुसंधान एकक के अधिकारियों ने प्रेजेंटेशन भी तैयार कर लिया है।
यह छूट किस तरीके से दी जाएगी, इस सवाल पर वह कहते हैं अभी इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। देखा जाए तो इस तरह के फैसले बजट पेश करने से कुछ दिन पहले होते हैं इसलिए यह छूट सीधे सीधे दी जाएगी या आय कर कानून की धारा 80सी के तहत दी जाएगी, इस बारे में बाद में फैसला किया जाएगा।
वित्त मंत्रालय के ही एक अन्य अधिकारी ने बताया कि आयकर छूट की सीमा बढ़ाने से होने वाले नुकसान के बारे में जायजा लिया जाने लगा है।
भाजपा ने किया था 3 लाख छूट का वादा
जोड़-घटाव करने के बाद पता चला है कि यदि आय कर में छूट की सीमा में 10 हजार रुपये की बढ़ोतरी की जाती है तो कर वसूली में करीब 1,500 करोड़ रुपये का नुकसान होता है। लेकिन इसकी भरपाई दूसरे तरीके से भी हो सकती है। दूसरे तरीके का मतलब अप्रत्यक्ष कर के मद में भरपाई से है।
उल्लेखनीय है कि आम चुनाव 2014 के प्रचार के दौरान भाजपा ने आय कर छूट की सीमा बढ़ा कर तीन लाख रुपये तक करने का वादा किया था।
यही नहीं, पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के समय वरिष्ठ भाजपा नेता यशवंत सिन्हा की अध्यक्षता में गठित संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने भी आय कर में छूट की सीमा बढ़ा कर तीन लाख रुपये करने की सिफारिश की थी। अभी यह सीमा ढाई लाख रुपये है।