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बीमा की शर्तें समझने में हो रही है मुश्किल, तो जान लें इन शब्दों के अर्थ

Tue, 15 Dec 2020 04:33 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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इंश्योरेंस - फोटो : pixabay
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साल 2020 में लोगों के लिए स्वास्थ्य और जीनव बीमा का महत्व बढ़ा है। कोरोना काल में लोग इंश्योरेंस की ओर ज्यादा आकर्षित हुए हैं। जिन लोगों ने पहले से ही बीमा करा रखा था, वे अब हेल्थ इंश्योरेंस का दायरा बढ़ा रहे हैं। अगर आपने भी बीमा करा लिया है, तो यह चेक कर लें कि वह पर्याप्त है या नहीं। बड़े शहरों में रहने वाले लोगों को कम से कम पांच से 10 लाख रुपये तक का बीमा कराना चाहिए। जीवन बीमा की बात करें, तो यह सालाना आय का 10 से 20 गुना होना चाहिए। 

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ज्यादातर लोगों के लिए इंश्योरेंस की शर्तों को समझना मुश्किल होता है। लोगों के लिए बीमा के कॉन्ट्रैक्ट में लिखे हुए नियम, शर्तें और शब्दों को समझना आसान नहीं। इसलिए हम आपको इंश्योरेंस से जुड़े कुछ ऐसे शब्द बताने जा रहे हैं जिनका आपके लिए लमझना जरूरी है। 

को-पेमेंट
को-पेमेंट बीमाधारक और बीमा कंपनी के बीच दावा राशि के पूर्व-निर्धारित हिससे को साझा करने के विकल्प को बताता है। इसमें पॉलिसी लेने वाला बीमा क्लेम के एक हिस्से का भुगतान करता है। इससे प्रीमियम कम करने में मदद मिलती है। यह पॉलिसी लेते समय ही तय कर लिया जाता है। अगर बीमाधारक 

कटौती या डिडक्टेबल
यह एक विशेष राशि होती है जिसके तहत बीमाधारक को स्वास्थ्य बीमा अमल में आने से पहले के खर्च को उठाना होता है। इससे भी प्रीमियम कम करन में मदद मिलती है। जितना ज्यादा डिडक्टेबल होता है, प्रीमियम उतना ही कम होता है। जैसे- अगर बीमाधारक ने 10,000 रुपये की कटौती का विकल्प चुना है, तो एक लाख रुपये के दावे में उन्हें 10,000 रुपये का भुगतान खुद करना होता है। 

फ्री लुक पीरियड
पॉलिसी के दस्तावेजों की प्राप्ति की तारीख से 15 दिन की अवधि फ्री लुक पीरियड होती है। यह हर नए स्वास्थ्य बीमा या व्यक्तिगत दुर्घटना पॉलिसीधारक को दी जाती है। इस दौरान आप फिर से विश्लेषण कर सकते हैं कि कोई विशेष प्लान आपके लिए उचित है या नहीं। अगर इस दौरान आपको पॉलिसी ठीक नहीं लगती है, तो इसे रद्द भी किया जा सकता है। ऐसे में ग्राहकों को प्रीमियम वापस कर दिया जाता है। 
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प्री-पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन
अस्पताल में भर्ती होने से पहले किए गए खर्चों (डायग्नोस्टिक, कंसल्टेशन, आदि) को प्री हॉस्पिटलाइजेशन खर्च माना जाता है। यह ध्यान रखें कि अस्पताल में भर्ती होने से पहले 30 से 60 दिन की अवधि प्री-हॉस्पिटलाइजेशन, जबकि अस्पताल में भर्ती के 90 से 180 दिन की अवधि पोस्टहॉस्पिटलाइजेशन की मानी जाती है। भर्ती होने के बाद किए गए खर्च में फॉलो-अप दवाएं, जांच, कीमो उपचार आदि शामिल होते हैं।

ग्रेस पीरियड
अगर किसी कारणवश बीमाकर्ता प्रीमियम का भुगतान करना भूल जाते हैं, तो बीमाकर्ता भुगतान के लिए अतिरिक्त 30 दिन प्राप्त करते हैं। ध्यान रहे कि इस दौरान धारकों को कवर नहीं किया जाता। जब आज प्रीमियम का भुगतान करते हैं, तो पॉलिसी पिर से बहाल कर दी जाती है। 
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