अगर आप एडवांस टैक्स के दायरे में आते हैं और 15 जून तक पहली किस्त का भुगतान नहीं किया है तो घबराने की बात नहीं है। इसकी दूसरी किस्त 15 सितंबर, 2020 तक भर सकते हैं। भुगतान नहीं करने पर ब्याज चुकाना पड़ सकता है। अगर आपकी कुल टैक्स देनदारी 10,000 रुपये या इससे ज्यादा होती है तो आप एडवांस टैक्स के दायरे में आते हैं। किसी भी वित्त वर्ष में इसका भुगतान चार किस्तों में होता है।
2020-21 के लिए करदाता 15 जून, 2020 तक कुल कर का 15%, 15 सितंबर तक 45%, 15 दिसंबर तक 75% व 15 मार्च, 2021 तक 100% भुगतान कर सकते हैं। ब्याज से बचने को समय पर एडवांस टैक्स चुकाएं। हालांकि, सीनियर सिटीजन को (अगर वह बिजनेस नहीं कर रहा है) यह टैक्स नहीं देना पड़ता है।
चूके तो हर महीने एक फीसदी ब्याज
इसके भुगतान में देरी पर आयकर अधिनियम-1961 की धारा 234सी के तहत कुल देनदारी पर हर महीने एक फीसदी की दर से ब्याज चुकाना पड़ता है। करदाता अगर भुगतान में विफल रहता है या 31मार्च, 2021 तक इसका 90% से कम चुकाता है तो धारा 234बी के तहत बतौर जुर्माना 1% ब्याज देना पड़ता है।
क्या है एडवांस टैक्स :
आयकर कानून-1961 की धारा 208 के तहत हर व्यक्तिगत करदाता को एडवांस टैक्स भरना होता है। इसमें व्यापारी, नौकरीपेशा या ऐसे करदाता शामिल होते हैं, जिनकी कई स्रोतों से आय होती है। अप्रैल से जून के दौरान होने वाली आय पर यह टैक्स लगता है। नौकरीपेशा के लिए वेतन के अलावा शेयर, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी या किसी अन्य स्रोत से आय पर भी टैक्स देना होता है।
महामारी में मिली 0.25% छूट
कोविड-19 महामारी को देखते हुए आयकर विभाग ने मार्च, 2020 में करदाताओं को राहत देते हुए ब्याज को एक फीसदी से घटाकर 0.75% कर दिया है। हालांकि, यह राहत सिर्फ दो किस्त 15 मार्च, 2020 और 15 जून, 2020 के भुगतान पर है। यानी आपने 2019-20 के लिए एडवांस टैक्स का भुगतान 15 मार्च, 2020 तक करने के बजाय 20 मार्च से 29 जून, 2020 के बीच किया है तो 0.75% ही ब्याज चुकाना होगा।
जमा करने के फायदे
आईटीआर फाइल करने के दौरान करदाता पर एक साथ नहीं पड़ता टैक्स का बोझ।
किस्तों में जमा करने पर प्रभावित नहीं होते रूटीन खर्चे।
समय पर जमा करें टैक्स। भुगतान में चूक पर देना पड़ता है 18% ब्याज।
''करदाताओं को कोशिश करनी चाहिए कि एडवांस्ड टैक्स को समय के भीतर ही भर दिया जाए, अगर 90% से ज्यादा भी भुगतान कर दिया जाता है तो कोई जुर्माना नहीं लगेगा। साथ ही हर साल अपनी आय पर नजर रखनी होगी, जिससे कर देनदारी का सही आकलन किया जा सके। '' -अतुल गर्ग, कर विशेषज्ञ