खुदरा कर्ज बढ़ने से मजबूत होगी अर्थव्यवस्था
देश के अधिकतर सरकारी बैंकों पर बढ़ते एनपीए के बोझ और बैड लोन के कारण बैंकिंग तंत्र काफी समय से मुश्किल में है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दर में गिरावट से खुदरा कर्ज लेना सस्ता हो जाएगा और इसमें इजाफे से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सकती है।
बैंकों का बढ़ रहा भरोसा
औद्योगिक और कारोबारी लोन के बड़ी मात्रा में एनपीए होने के कारण बैंकों का रुझान खुदरा कर्ज देने की ओर बढ़ रहा है। क्रेडिट ब्यूरो सहित अन्य सुधारवादी कदमों के बाद उनका भरोसा खुदरा कर्जदारों में मजबूत हुआ है।
वर्ष 2013 में जहां बैंकों के कुल कर्ज में खुदरा कर्ज का हिस्सा 18.3 फीसदी था, वहीं मार्च,2018 में यह 24.8 फीसदी हो गया। इसके बाद अक्तूबर के हालिया आंकड़ों में यह हिस्सा 25.5 फीसदी पहुंच गया है।
आधे से ज्यादा खुदरा कर्ज
देश के तीन सबसे बड़े बैंकों के आंकड़ों को देखें तो उनके कुल कर्ज में से आधे से ज्यादा हिस्सा खुदरा कर्ज का है। एसबीआई, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के लोन बुक में खुदरा कर्ज की हिस्सेदारी 50 फीसदी से ज्यादा है। इसी तरह, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक के लोन बुक में भी खुदरा कर्ज की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी है।
कॉरपोरेट लोन में तेजी से काफी ज्यादा गिरावट आई है। ऐसे में हमारा अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष की समाप्ति तक कुल कर्ज में खुदरा कर्ज की हिस्सेदारी बढ़कर 60 फीसदी हो जाएगी।
-पीके गुप्ता, प्रबंधन निदेशक (खुदरा बैँकिंग) एसबीआई