रिजर्व बैंक कर चुका है इतनी कटौती
रिजर्व बैंक वर्ष 2019 के दौरान रेपो रेट में 1.10 फीसदी की कटौती कर चुका है। अभी रेपो रेट 5.40 फीसदी है। इसके मद्देनजर लोन की ब्याज दर को रेपो रेट से लिंक करने से पुराने हाउसिंग लोन की ब्याज दर में एक फीसदी तक की कमी संभव होगी।
तीन तरह के बेंचमार्क रेट
बैंकों में फिलहाल तीन तरह के एक्सटर्नल बेंचमार्क रेट चल रहे हैं, जिनके हिसाब से ब्याज दरों को तय किया जाता है। बेंचमार्क आधारित ब्याज दर को तय करने का तरीका ज्यादा पारदर्शी नहीं होता है। बैंक लोन की ब्याज दर को बेंचमार्क रेट के हिसाब से तय करते थे। लेकिन बैंकों की बेंचमार्क रेट अलग-अलग होने से कर्ज की ब्याज दर में काफी अंतर हो जाता था। हर बैंक की अपनी बेंचमार्क रेट होती थी।
एमसीएलआर ज्यादा पारदर्शी व्यवस्था
बैंकों में लोन की ब्याज दर को तय करने के लिए लागू की एमसीएलआर ज्यादा पारदर्शी व्यवस्था है। लेकिन इसमें कमी है कि बैंक इसको तय करते वक्त आरबीआई द्वारा रेपो रेट में किए गए बदलाव को पूरी तरह से समायोजित नहीं करते हैं। एमसीएलआर आधारित ब्याज दर एक से तीन साल के लिए तय होती है। तय अवधि के बाद ब्याज दर को संशोधित कराया जा सकता है।
आरआरएलआर से पड़ेगा ज्यादा असर
एक अक्तूबर से देश भर में सभी बैंकों में ब्याज दरों को रेपो रेट से लिंक कर दिया गया है। इससे ब्याज दरों में कमी आई है। ऐसा इसलिए क्योंकि आरबीआई फिलहाल रेपो रेट में कमी करता जा रहा है। अगर भविष्य में आरबीआई रेपो रेट में किसी तरह की कोई बढ़ोतरी करता है, तो फिर इसका असर आपके लोन की ईएमआई पर भी पड़ेगा। रेपो रेट में कमी पर ब्याज दर उसी अनुपात में कम या बढ़ने पर उसी अनुपात में बढ़ेगी। रिजर्व बैंक हर दो माह में रेपो रेट की समीक्षा और महंगाई दर के हिसाब से इसमें कमी व बढ़ोतरी करता है।