कैसे करता है काम?
जीपीएफ अकाउंट में सरकारी कर्मचारी को किस्तों में एक निश्चित वक्त तक योगदान देना होता है। अकाउंट होल्डर जीपीएफ खोलते वक्त नॉमिनी भी बना सकता है। अकाउंट होल्डर को रिटायरमेंट के बाद इसमें जमा पैसों का भुगतान किया जाता है, वहीं अगर अकाउंट होल्डर को कुछ हो जाए तो नॉमिनी को भुगतान किया जाता है।
लोन की भी मिलती है सुविधा
जीपीएफ से कर्मचारियों को लोन लेने की भी सुविधा मिलती है और खास बात यह है कि लोन ब्याज मुक्त होता है। कोई कर्मचारी अपने पूरे करियर में कितनी ही बार जीपीएफ से लोन ले सकता है यानी इसकी कोई निश्चित संख्या नहीं है।
पीएफ और जीपीएफ में क्या है अंतर?
प्रोविडेंट फंड (पीएफ) अकाउंट किसी भी कर्मचारी का हो सकता है। चाहे वह सरकारी नौकरी करता हो या किसी निजी कंपनी में काम करता हो। इसे नियोक्ता द्वारा खोला जाता है और कर्मचारी व नियोक्ता दोनों की ओर से योगदान दिया जाता है। नियोक्ता के योगदान में से कुछ हिस्सा पेंशन में जाता है।
क्या है पीपीएफ?
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) खाते को कोई भी नागरिक खुद से खुलवा सकता है। इसके लिए उसका कर्मचारी होना जरूरी नहीं है। यह सेविंग्स कम टैक्स सेविंग्स खाता होता है। इसका फायदा यह है कि इसमें होने वाला डिपॉजिट टैक्स फ्री रहता है, उस पर मिलने वाले ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाला पैसे पर भी टैक्स नहीं लगता है। पीपीएफ का मैच्योरिटी पीरियड 15 साल है। इसमें सालाना 500 रुपए के न्यूनतम निवेश से लेकर 1.5 लाख रुपये तक का अधिकतम निवेश किया जा सकता है।