कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ)से पैसे की निकासी के समय कर लगाने के प्रस्ताव पर मचे घमासान के बाद इसे वापस लिया जा सकता है। इस प्रस्ताव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से बात की है। हालांकि, इसमें किसी भी बदलाव की घोषणा संसद में ही होगी।
सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री ने इस मसले पर जेटली से बात की और कहा है कि इस मामले में अच्छे सुझावों को माना जाना चाहिए। वित्त मंत्री ने 2016-17 के बजट की घोषणा करते हुए ईपीएफ को टैक्स के दायरे में लाने का प्रस्ताव रखा था।
इस प्रस्ताव के मुताबिक एक अप्रैल 2016 से ईपीएफ खाते से पैसा निकालने पर 40 फीसदी राशि कर मुक्त होगी। जबकि शेष राशि पर कर लगेगा। अभी तक इस योजना से राशि की निकासी पर कोई कर नहीं लगता है। सरकार के इस प्रस्ताव का मजदूर संगठनों ने भी काफी विरोध किया और विपक्ष ने भी इसे वापस लेने की जोरदार मांग की है। एक सूत्र ने बताया कि इस प्रस्ताव को लेकर किए गए फैसले की घोषणा संसद में ही होगी।
खुद वित्त मंत्री भी बोल चुके हैं कि संसद के कुछ अधिकार होते हैं और ऐसी घोषणाएं संसद में ही होती है। कुछ लोगों का कहना है कि वित्त मंत्रालय ने पीएफआरडीए की योजना एनपीएस को लोकप्रिय बनाने के लिए ईपीएफ एवं इसके जैसी अन्य पेंशन योजनाओं को कर के दायरे में ला दिया है। दरअसल पीएफआरडीए वित्त मंत्रालय के तहत काम करता है जबकि ईपीएफओ श्रम मंत्रालय के तहत।