घरेलू काले धन की घोषणा करने की आय घोषणा योजना (आईडीएस) बुधवार से लागू हो गई है। इसके साथ ही सरकार ने प्रत्यक्ष कर विवाद समाधान योजना 2016 और गूगल टैक्स के नाम से चर्चित शुल्क समानता (इक्विलाइजेशन) लेवी को भी बुधवार से लागू कर दिया है। केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) का कहना है कि आईडीएस से वैसे लोगों को मन की शांति मिलेगी जिन्होंने अभी तक अपने काले धन की घोषणा नहीं की है।
आईडीएस 1 जून 2016 से शुरू होगी और चार महीने तक चलेगी। अधिकारियों का कहना है कि यह एक बार ही मिलने वाला मौका है। संबंधित करदाता इसका लाभ उठाएं और समाज के निर्माण में योगदान करें। इससे समाज में उनकी इज्जत भी बढ़ेगी। योजना के तहत घोषणा करने वालों को घोषित रकम पर महज 30 फीसदी का कर वसूला जाएगा। इसके अलावा कर के रूप में चुकायी गई रकम पर 25 फीसदी का कृषि कल्याण सेस और 25 फीसदी का जुर्माना वसूला जाएगा। यदि घोषित की गई रकम के मुकाबले कुल राशि को जोड़े तो यह 45 फीसदी बैठता है।
इसी के साथ प्रत्यक्ष कर विवाद एवं समाधान योजना-2016 भी बुधवार से लागू हो रही है। प्रत्यक्ष कर के क्षेत्र में विभन्न पंचाटों, न्यायालयों आदि में लंबित मुकदमों की संख्या में कमी लाना इसका प्रमुख उद्देश्य है। इस संदर्भ में अधिसूचित प्रासंगिक नियम और फार्म आयकर विभाग की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक प्रत्यक्ष कर विवाद एवं समाधान योजना-2016 को वित्त अधिनियम-2016 के तहत कर बकाया और विशेष कर से संबंधित घोषणा 31 दिसम्बर 2016 या उससे पहले की जा सकती है।
वित्त अधिनियम 2016 में शामिल इक्वेलाइजेशन लेवी से संबंधित फार्म भी आयकर विभाग की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। गूगल टैक्स के नाम से प्रसिद्ध इक्वलाइजेशन लेवी के नियम के अनुसार देश के कारोबारियों को विदेशी ऑनलाइन सर्विस प्रोवाइडर जैसे गूगल, याहू, फेसबुक, ट्वीटर को विज्ञापन देने पर छह फीसदी टैक्स देना पड़ेगा। फिलहाल यह टैक्स एक लाख से ऊपर के विज्ञापन पर ही लगेगा और यह लेवी सिर्फ बिजनेस टू बिजनेस (बीटूबी) पर ही लगेगा।