सतर्कता बरतें निवेशक
डॉलर की मजबूती और बॉन्ड की ब्याज दरों के बढ़ने से विदेशी निवेशक बिकवाल बने हुए हैं। अमेरिका के फेडरल रिजर्व और कई देशों के केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर में बढ़ोतरी करने की रणनीति से वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें ऊपर जा रही हैं। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रुख अपनाना चाहिए। -वीके विजय कुमार, मुख्य निवेश रणनीतिकार, जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेस
विदेशी निवेशक लगातार कर रहे निकासी
आंकड़े बताते हैं कि विदेशी निवेशक केवल भारतीय बाजार से ही पैसे नहीं निकाल रहे हैं, बल्कि वे बहुत सारे उभरते हुए बाजारों से पैसे निकाल रहे हैं। खासतौर पर ताइवान, दक्षिण कोरिया, फिलीपीन और थाईलैंड के साथ भारत जैसे बाजारों से।
- भारतीय बाजार से इस साल अब तक 2 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई है। विदेशी निवेशकों ने जून में 31 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे हैं। आगे भी यही रुझान जारी रहेगा।
- इनके बेचने का प्रमुख कारण यह है कि दुनियाभर में ब्याज दरें बढ़ रही हैं। इसलिए वे शेयर बाजारों से पैसा निकालकर अब बैक एफडी में डाल रहे हैं, जहां ज्यादा मुनाफा मिल रहा है।
स्मॉल कैप भी बेहतर
निवेश को लेकर कभी भी यह धारणा गलत साबित हो सकती है कि केवल बड़े शेयर ही मुनाफा दे सकते हैं। आंकड़े बताते हैं कि लार्ज और मिडकैप की तरह स्मॉलकैप ने भी अच्छा रिटर्न दिया है।
- पिछले 10 वर्षों में 6 बार स्मॉलकैप के शेयरों ने दो अंकों से ज्यादा फायदा दिया है, जबकि चार बार घाटा दिया है।
| वर्ष |
रिटर्न |
| 2014 |
43% |
| 2015 |
10% |
| 2016 |
26% |
| 2017 |
40% |
| 2018 |
-25% |
| 2019 |
-2% |
| 2020 |
20% |
| 2021 |
41% |
| 2022 |
-22% |