इक्विटी में निवेश चाहे सीधे शेयर खरीद कर करें या म्यूचुअल फंड के रास्ते, बेहतर रिटर्न पाने के लिए निवेशकों को थोड़ा लंबा यानी लांग टर्म नजरिया रखकर चलना चाहिए। इसके अलावा शॉर्ट टर्म में किसी शेयर या फंड का प्रदर्शन देख कर उसमें पैसा लगाने का फैसला नहीं करना चाहिए। इसके लिए दीर्घ कालीन प्रदर्शन और साख को ही आधार बनाना उचित रहता है।
धैर्य है मुनाफे की चाबी
इक्विटी में निवेश की पहली जरूरी बात है धैर्य, क्योंकि धैर्य के बिना अकसर निवेशक बाजार की उठा-पटक से घबरा जाते हैं और शेयर या फंड के एनएवी में गिरावट देख आनन-फानन में उसे घाटा उठाकर बेच देते हैं। लांग टर्म का नजरिया रखने वाला निवेशक ऐसा नहीं करता और अपने निवेश को शॉर्ट टर्म की गिरावटों से उबरने का मौका देते हुए लांग टर्म में एक अच्छा मुनाफा कमा लेता है।
निवेशकों के लिए गौर करने वाली बात यह है कि पिछले 5 सालों में बुरे दौर से गुजरने के बावजूद सेंसेक्स का औसत सालाना रिटर्न करीब 20 फीसदी रहा है। इससे यह पता चलता है कि लंबी अवधि के निवेश में हमेशा इक्विटी मार्केट अन्य निवेशों की तुलना में अच्छा देता है। लिहाजा इक्विटी मार्केट में धैर्य और लंबी अवधि का नजरिया रखना जरूरी है।
रिसर्च के बाद लें फैसला
कोई भी शेयर या इक्विटी फंड खरीदने से पहले पूरी रिसर्च करनी चाहिए। यह रिसर्च केवल हाल के उतार-चढ़ाव और कंपनी के हालिया फैसलों व प्रोफाइल तक ही सीमित न रह कर उसके फंडामेटल्स तक जाए। ऐसा करके ही आप निवेश से जुड़ा मुनासिब फैसला ले सकते हैं।
आपके पास अगर खुद का कोई रिसर्च नहीं है, तो इक्विटी से संतोषजनक मुनाफा कमाने के लिए एक मोटा नियम यह है कि निवेशक इंडेक्स फंड में ही लंबी अवधि के लिए निवेश करे, क्योंकि इंडेक्स फंड से लंबी अवधि में आमतौर पर अच्छा फायदा मिल जाता है। बहुत बारीक जानकारी न होने पर चुनिंदा ब्लूचिप शेयरों में भी लांग टर्म निवेश किया जा सकता है। ध्यान यह रहे कि इन कंपनियों का वित्तीय ढांचा और साख मजबूत हो और यह ऐसे कारोबार में हों, जिसकी मांग लंबे समय तक बनी रहने वाली हो।
डर-लालच से रहें दूर
निवेशक को लालच और डर की चपेट से मुक्त रहना चाहिए क्योंकि इनके चंगुल में फंसने पर चोट खाना तय है। डर से बचने का आसान रास्ता यह है कि निवेश के वक्त ही उससे मुनाफे का एक व्यावहारिक लक्ष्य तय कर लिया जाए और बीच के उतार-चढ़ावों से गुजरते हुए शेयर को उस मुकाम तक पहुंचने का मौका दिया जाए। लालच से बचने का फार्मूला यह है कि लक्ष्य तक पहुंच जाने पर मुनाफा वसूल लें।
ध्यान रखें कि टॉप पर पहुंच कर शेयर बेचने और अधिकतम मुनाफा कमाने की तमन्ना एक मृगमरीचिका सी होती है, क्योंकि बाजार का बड़ा से बड़ा जानकार भी पुख्ता तौर पर यह नहीं बता सकता कि कब बाजार करवट बदल लेगा और आपका मुनाफा कमाता शेयर अचानक गिरावट के चक्रव्यूह में फंस जाएगा।
इसलिए अपना लक्ष्य हासिल करने के बाद शेयर कैश कर लेने में ही समझदारी है। इस मुनाफे पर मुनाफा कमाने के लिए उस पैसे को सोच-समझ कर दूसरे अच्छे शेयर में लगाया जा सकता है।
--जानकारियों का अभाव हो, तो शुरुआत हमेशा छोटे निवेश से करनी चाहिए।
--शुरुआत में काफी ज्यादा कंपनियों के शेयर न खरीदें, वर्ना आप उलझ कर रह जाएंगे।
--एक ही सेक्टर की ज्यादा कंपनियों में भी पैसा न लगाकर इसमें विविधता रखने से जोखिम घट जाता है।
--एफएमसीजी, फार्मा जैसे डिफेंसिव सेक्टरों को पोर्टफोलियो में रखें क्योंकि इनकी मांग हमेशा रहती है।
--बैंकिंग, ऑटो, आईटी और रीयल्टी जैसे वोलेटाइल व सेंस्टिव सेक्टरों में जानकारी होने पर ही हाथ लगाएं।
--परफार्मेंस देखकर एक तय अवधि के बाद अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करें व जरूरत पड़ने पर बदलाव करें।