किसी कर्मचारी को उसके संगठन के दूसरे विभाग में भेज कर प्रॉविडेंट फंड के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता है।
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निस्तारण आयोग ने कहा है किसी कर्मचारी को उसके संगठन के दूसरे डिवीजन में भेजने पर भी उसे कर्मचारी भविष्य निधि के तहत मिल रहे लाभ जारी रहेंगे।
जस्टिस के.एस. चौधुरी की एक बेंच ने इस तरह के एक मामले में ओडिशा स्टेट एंड डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर फोरा के आदेश का समर्थन किया है।
फोरा ने रीजनल प्रॉविडेंट फंड कमिश्नर को पोडागाढ़ा और कपूर डैम डिवीजन में 1987 में अपनी मृत्यु तक तैनात जीएसएन रेड्डी को 1981 से पेंशन अदा करने का आदेश जारी किया था।
रीजनल प्रॉविडेंट फंड कमिश्नर ने कहा था कि नवंबर 1983 में एक डिवीजन से दूसरे में तबादला कर दिए जाने के बाद उनकी सर्विस में ब्रेक आ गया था। लिहाजा वह ईपीएफ के तहत इसका लाभ हासिल करने के हकदार नहीं है।
उड़ीसा राज्य आयोग ने भी रीजनल प्रॉविडेंट फंड कमिश्नर को कारपेंटर जीएसएन रेड्डी की पत्नी को पेंशन अदा करने के डिस्ट्रिक्ट फोरम के निर्देश का समर्थन किया था। रेड्डी की 1987 में मौत हो गई थी। इसके बाद उनकी पत्नी ने पेंशन के लिए दावा किया था।