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आपात मेडिकल जरूरत पर सपोर्ट देता है हेल्थ इंश्योरेंस

Mon, 08 Oct 2012 11:04 PM IST
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क
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यदि आप अपनी स्वास्थ्य बीमा कंपनी की सेवाओं से संतुष्ट नहीं है। या वह क्लेम के समय आनाकानी करती है या किसी विशेष डॉक्टर या अस्पताल में इलाज का दबाव डालती है, तो अब आपके पास हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी का विकल्प उपलब्ध है। यानी, आप अपनी वर्तमान पॉलिसी को जारी रखते हुए कंपनी बदल सकते हैं। 1 अक्तूबर 2011 से हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी देशभर में लागू हो गई है।
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हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी के अंतर्गत, कंपनी बदलने के लिए आपको सबसे पहले उस कंपनी से संपर्क करना है, जिसकी पॉलिसी आप लेना चाहते हैं। नई बीमा कंपनी आपको एक पोर्टेबिलिटी फॉर्म देगी, जिसे आपको प्रपोजल फॉर्म के साथ जमा करना होगा। इसके बाद नई कंपनी बदलाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर इससे जुड़े दस्तावेज सात दिन में बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) की वेबसाइट पर भेजती है।

इसके बाद मौजूदा कंपनी सात दिन में बीमाधारक के दस्तावेज इरडा को भेजती है। नई कंपनी संतुष्ट होने पर पॉलिसी को स्वीकार कर लेती है। इसके बाद आप पिछली कंपनी में मिल रही सुविधाओं का फायदा उठाने के पात्र हो जाते हैं। ऐसा नहीं है कि आप किसी भी वक्त अपनी बीमा कंपनी बदल सकते हैं। अपनी मौजूदा पॉलिसी को रीन्यू कराने के 45 दिन पहले ही आप पोर्टेबिलिटी के लिए आवेदन कर सकते हैं।
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इंश्योरेंस पोटेर्बिलिटी का विकल्प चुनने से पहले आपको सजगता से तमाम विवरण पढ़ना चाहिए, क्योंकि एक बार यह विकल्प चुनने के बाद आप इससे बाहर नहीं निकल सकते हैं। अगर आपको इंश्योरेंश कंपनी के खिलाफ शिकायत करनी है तो इरडा की वेबसाइट WWW.igms.irda.gov.in पर जा सकते हैं। इसके अलावा complaint@irda.gov.in पर ईमेल के जरिए शिकायत भेज सकते हैं।

नो-क्लेम बोनस का हो सकता है नुकसान
पोर्टेबिलिटी का विकल्प अपनाने में आपको नो-क्लेम बोनस का नुकसान उठाना पड़ सकता है। यदि आपने नो-क्लेम बोनस इकट्ठा किया हो तो पोर्टेबिलिटी से आपको इसका नुकसान हो सकता है। हालांकि, अगर आप नो-क्लेम बोनस को नई पॉलिसी के साथ हासिल करना चाहते हैं तो आपको इसके लिए ज्यादा प्रीमियम चुकाना पड़ सकता है।

इनकम टैक्स में भी मिलती है छूट
स्वास्थ्य बीमा के प्रीमियम पर इनकम टैक्स में भी छूट मिलती है। अधिकांश लोग कर बचाने के लिए जीवन बीमा तो करा लेते हैं लेकिन स्वास्थ्य बीमा से गुरेज करते हैं। टर्म बीमा को छोड़ कर अन्य जीवन बीमा योजनाओं में निवेश का भी सामंजस्य रहता है, जिससे लोग इसे ले लेते हैं। जबकि, स्वास्थ्य बीमा के प्रीमियम पर कर छूट का लाभ मिलता है लेकिन पॉलिसी पर बीमारी का दावा नहीं होने पर पॉलिसीधारक को साल के आखिर में कुछ नहीं मिलता। बावजूद इसके इस बीमा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे मिलता है मानसिक सुकून। आयकर कानून की धारा 80 डी के तहत 65 साल से कम उम्र के पालिसी धारक को 15 हजार रुपये की और 65 साल से अधिक उम्र के पालिसी धारक को 20 हजार रुपये की कर छूट मिलती है।

हेल्थ इंश्योरेंस में क्या होता है कवर
स्वास्थ्य बीमा प्लान के अंतर्गत बीमारी से लेकर दुघर्टना तक के समय होने वाले खर्चों को कवर किया जाता है। सामान्यत: स्वास्थ्य बीमा लेने के बाद खर्च का दावा करने के लिए आपको कम से कम एक दिन अस्पताल में भर्ती होना जरूरी होता है। इलाज की स्थिति में पालिसी धारक को बिना समय गंवाए संबद्ध थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (टीपीए) को सूचित करना चाहिए।

जरूरत के मुताबिक लें स्वास्थ्य बीमा
स्वास्थ्य बीमा को अपनी जरूरत के मुताबिक लेना चाहिए। सिर्फ टैक्स बचाने के लिए ही स्वास्थ्य बीमा लेना समझदारी नहीं है। बाजार में हरेक व्यक्ति और परिवार की जरूरतों के हिसाब से प्लान उपलब्ध हैं, जिनकी किस्त भी अलग-अलग हैं।

प्रिवेंटिव केयर का भी है प्रावधान
आजकल बाजार में ऐसी पॉलिसियां भी हैं, जिनमें प्रिवेंटिव केयर का प्रावधान होता है और वह स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, मुफ्त स्वास्थ्य परीक्षण और समर्पित हेल्थलाइन के माध्यम से प्रिवेंटिव हेल्थकेयर की सुविधा देती हैं।
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