2017 की शुरुआत में लोगों को नोटबंदी का सामना करना पड़ा था। इस दौरान लोगों पर इसका असर साल शुरू होने के 6 माह बाद तक देखना पड़ा था। हालांकि लोगों को तब आरबीआई के सर्कुलर से काफी परेशानी हुई थी, क्योंकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) रोज नए-नए सर्कुलर जारी कर रहा था जिसमें पहले कहीं अपनी ही बातों से पीछे हट रहा था। नोटबंदी के बाद लोगों को एटीएम के सामने लंबी लाइन और कैश वाले एटीएम को ढूंढते हुए देखा जाता था। लोग अपना समय एटीएम में कैश निकालने में लगाते थे।
नोटबंदी से पड़ा था नए साल की पार्टियों पर असर
नोटबंदी से नए साल पर सबसे पहले देश भर में स्वागत के लिए होने वाली पार्टियों पर असर पड़ा था। तब बहुत ज्यादा जोश के साथ नए साल का स्वागत नहीं हुआ था। इसके अलावा कैश की उपलब्धता भी पूरे देश में ठीक नहीं हो पाई थी।
पुराने नोट जमा करने की तारीख में किया था बदलाव
नोटबंदी के वक्त पीएम नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी बंद हुए 500 और 1000 के नोट को लोग 31 मार्च 2017 तक बदल सकते हैं। लेकिन दिसबंर खत्म होने से कुछ दिन पहले ही आरबीआई ने इसको घटाकर के 31 दिसंबर आखिरी तारीख कर दी थी।
इससे लोगों में काफी रोष व्याप्त हो गया था। इसके बाद आरबीआई ने कहा कि केवल एनआरआई या फिर उन लोगों को नोट जमा करवाने का मौका मिलेगा जो नोटबंदी के समय देश से बाहर थे।