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#2017Yearender: नोटबंदी से पड़ा था 6 माह तक असर, RBI बन गया था रिवर्स बैंक ऑफ इंडिया

Fri, 22 Dec 2017 04:41 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला डिजिटल, नई दिल्ली
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अारबीअाई
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2017 की शुरुआत में लोगों को नोटबंदी का सामना करना पड़ा था। इस दौरान लोगों पर इसका असर साल शुरू होने के 6 माह बाद तक देखना पड़ा था। हालांकि लोगों को तब आरबीआई के सर्कुलर से काफी परेशानी हुई थी, क्योंकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) रोज नए-नए सर्कुलर जारी कर रहा था जिसमें पहले कहीं अपनी ही बातों से पीछे हट रहा था। नोटबंदी के बाद लोगों को एटीएम के सामने लंबी लाइन और कैश वाले एटीएम को ढूंढते हुए देखा जाता था। लोग अपना समय एटीएम में कैश निकालने में लगाते थे। 
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नोटबंदी से पड़ा था नए साल की पार्टियों पर असर
नोटबंदी से नए साल पर सबसे पहले देश भर में स्वागत के लिए होने वाली पार्टियों पर असर पड़ा था। तब बहुत ज्यादा जोश के साथ नए साल का स्वागत नहीं हुआ था। इसके अलावा कैश की उपलब्धता भी पूरे देश में ठीक नहीं हो पाई थी। 

पुराने नोट जमा करने की तारीख में किया था बदलाव
नोटबंदी के वक्त पीएम नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी बंद हुए 500 और 1000 के नोट को लोग 31 मार्च 2017 तक बदल सकते हैं। लेकिन दिसबंर खत्म होने से कुछ दिन पहले ही आरबीआई ने इसको घटाकर के 31 दिसंबर आखिरी तारीख कर दी थी।
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इससे लोगों में काफी रोष व्याप्त हो गया था। इसके बाद आरबीआई ने कहा कि केवल एनआरआई या फिर उन लोगों को नोट जमा करवाने का मौका मिलेगा जो नोटबंदी के समय देश से बाहर थे। 
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वित्त मंत्री और आरबीआई के सर्कुलर में दिखा भ्रम

नोटबंदी पर वित्त मंत्री अरुण जेटली के  बयान और इस बारे में रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से जारी अधिसूचना ने जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी थी। वित्त मंत्री ने कहा था कि पहली बार कोई व्यक्ति चाहे जितनी मर्जी पुराने नोट जमा करा सकते हैं और इस दौरान उससे कोई पूछताछ नहीं होगी।

लेकिन आरबीआई की चिट्ठी में कहा गया कि 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों में 5000 रुपये से अधिक रकम जमा करने वालों को बताना होगा कि अभी तक वे ऐसा क्यों नहीं कर पाए। 

जेटली ने कहा था कि कोई व्यक्ति एक बार में कितनी भी रकम जमा करा सकता है, उससे बैंक के अधिकारी पूछताछ नहीं करेंगे। वहीं रिजर्व बैंक का कहना था कि 30 दिसंबर तक एक खाते में 5000 रुपये से अधिक के पुराने नोट जमा करने वालों से बैंक अधिकारी पूछताछ करेंगे।

उससे दो बैंक अधिकारी सवाल करेंगे कि अभी तक वह इतनी रकम जमा क्यों नहीं करा पाए थे। यही नहीं, इस पूछताछ का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा ताकि बाद की जांच प्रक्रिया में इसका इस्तेमाल किया जा सके।  

पेट्रोल पंपों पर लगने लगा था सर्विस चार्ज
नोटबंदी के बाद शुरुआत में पेट्रोल पंप पर डेबिट-क्रेडिट कार्ड से पेट्रोल-डीजल भरवाने पर किसी प्रकार का कोई सर्विस चार्ज नहीं लगता था। इसकी अवधि 50 दिनों की थी। पेट्रोल पंपों ने डेबिट और क्रेडिट कार्ड से भुगतान स्वीकार न करने के अपने फैसले पर अमल 13 जनवरी तक टाल दिया था।

बैंकों की ओर से उपभोक्ताओं के बजाय पेट्रोल पंपों पर ट्रांजेक्शन चार्ज लगाने के विरोध में पेट्रोल पंप मालिकों ने यह फैसला किया था। गौरतलब है ‌कि नोटबंदी के बाद कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कार्ड से पेट्रोल-डीजल की खरीद पर उपभोक्ताओं से वसूला जाने वाला मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को खत्म कर दिया था।

लेकिन, नोटबंदी की 50 दिनों की अवधि खत्म होने के बाद बैंकों ने एमडीआर पेट्रोल पंप मालिकों पर लगाने का फैसला किया था। वैसे बैंकों के इस फैसले से सीधे उपभोक्ताओं पर कोई बोझ नहीं पड़ेगा। 
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