पिछले साल 8 नवंबर को हुई नोटबंदी के बाद बाजार डिजिटल भुगतान की तरफ बढ़ गया था। छोटे दुकानदार भी कैश की कमी की वजह से मोबाइल वॉलेट, स्वाइप मशीन का इस्तेमाल करने लगे थे।
यहां तक कि रेहड़ी-पटरी पर सामान बेचने वाले भी मोबाइल वॉलेट से पेमेंट ले रहे थे। जैसे ही नकदी की उपलब्धता बढ़ी, डिजिटल पेमेंट का दौर फिर खत्म होने लगा। अब छोटे बाजारों में 90 प्रतिशत तक कारोबार कैश में ही हो रहा है। हालांकि 2 हजार के नोट को खुले करने में अब भी दुकानदार आनाकानी करते हैं।
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नोटबंदी के बाद नोएडा के हरौला मार्केट, भंगेल आदि बाजारों में सब्जी वाली रेहड़ियों पर मोबाइल वॉलेट के बोर्ड लगे दिखते थे। धीरे-धीरे सब गायब हो गए हैं। यहां तक कि डिजिटल पेमेंट में होने वाली दिक्कतों को देखते हुए लोगों ने दुकानदारों से स्वाइप मशीन तक हटवा दी हैं।
वहीं कार्ड से पेमेंट करने पर दुकानदार 2 पर्सेंट अतिरिक्त लेते हैं। ऐसे में लोग ज्यादा पैसे देने की बजाय कैश देने को ही तवज्जो दे रहे हैं।