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इन पांच कारणों को किया नजरअंदाज, तो बढ़ेगा बीमा प्रीमियम का बोझ

Mon, 11 Nov 2019 02:22 PM IST
Trainee Trainee बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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- फोटो : अमर उजाला
परिजनों को वित्तीय सुरक्षा देने या किसी आकस्मिक स्थिति में बीमारी के बोझ के खर्च से राहत दिलाने के लिए बीमा उत्पाद को निवेश का सबसे लोकप्रिय और उपयुक्त साधन माना जाता है। इसके बदले बीमाधारक को नियमित प्रीमियम का भुगतान करना होता है। किसी भी बीमा पॉलिसी का प्रीमियम तय करने में आपके जीवने की कई बातें असर छोड़ती हैं। इनमे शराब की लत, धूम्रपान और खतरा मोल लेकर व्यवसाय करने सहित पांच कारण प्रीमियम के बोझ को और ज्यादा बढ़ाते हैं।
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Smoking while driving

भारी पड़ेगी सिगरेट और शराब की लत

सिगरेट और शराब की लत सेहत को खतरे में डालने के साथ ही बीमारी और मौत की आशंका को और ज्यादा बढ़ाती है। लिहाजा बीमा कंपनियां प्रीमियम तय करने के साथ ही उपभोक्ता से इन बुरी आदतों के बारे में जानकारी इकटृठा करती हैं। यदि आप सिगरेट और शराब के आदती नहीं हैं, तो आपको प्रीमियम का भुगतान कम करना होता है। इसके उलट, अगर आप दोनों नशे के आदती हैं, तो प्रीमियम का भुगतान ज्यादा करना होता है और आपकी जेब पर भी बोझ बढ़ता है। ऐसा बीमाधारकों की उम्र और पॉलिसी में समानता होने पर संभव है।
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आग बुझाते दमकलकर्मी - फोटो : अमर उजाला

काम में जोखिम लेना बढ़ाएगा प्रीमियम

यदि आपका व्यवसाय या कार्य ऐसा है जिसमे जिंदगी को अधिक खतरा है, जैसे समुद्र डायविंग, फायर फायटिंग आदि तो बीमा कंपनियां एक सामान्य व्यक्ति की तुलना में आपसे ज्यादा प्रीमियम वसूलती हैं। कुछ बीमा कंपनियां तो इस तरह के व्यक्ति का बीमा करने से भी इनकार कर देती हैं।

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आपकी सेहत भी डालती है असर

यदि उपभोक्ता का वजन, लंबाई और उम्र के अनुपात में ज्यादा है, तो प्रीमियम की राशि भी अधिक होगी। दरअसल, मोटापे के शिकार लोगों में हृदय रोग, डायबिटीज,रक्तचाप से जुड़ी बीमारियों की आशंका ज्यादा होती है। इसके अलावा बीमा कंपनियां आवेदक की शारीरिक स्थिति का सही अनुमान लगाने के लिए स्वास्थ्य परीक्षण भी कराती हैं।
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पीढ़ी दर पीढ़ी मिलने वाली बीमारियां   

बीमा कंपनी आवेदक से पॉलिसी करवाते समय अनुवांशिक बीमारियों के संबंध में भी जानकारी मांगती हैं। अगर ऐसी कोई बीमारी है तो पॉलिसीधारक को ज्यादा प्रीमियम का भुगतान करना होगा। बीमा कंपनियां बीमाधारक के जीवन या स्वास्थ्य जोखिमों को सर्वाधिक अहमियत देती हैं। ऐसे में किसी अनुवांशिक बीमारी की आशंका से बीमाधारक का प्रीमियम भी बढ़ता है।
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बीमा अवधि व राशि

बीमा की अवधि जितनी लंबी होती है, प्रीमियम की राशि भी उतनी ही कम होती है। ऐसे में कम उम्र के बीमाधारक को कम प्रीमियम का भुगतान करना होता है। इसके अलावा दावे के समय मिलने वाली सम एश्योर्ड राशि भी प्रीमियम को प्रभावित करती है। आपके बीमा की सम एश्योर्ड राशि जितनी ज्यादा रहेगी, उसका प्रीमियम भी बढ़ेगा। हालांकि, इससे परिपक्वता अवधि पर ज्यादा मुनाफा मिलता है।

पॉलिसी बाजार (स्वास्थ्य बीमा) के प्रमुख अमित छाबड़ा ने बताया कि बीमाधारक के जोखिम के आधार पर बीमा कंपनियां प्लान देते समय प्रीमियम की दर भी तय कर देती हैं। हर कंपनी के पास इसके जोखिम के मूल्यांकन का अलग-अलग तरीका होता है। ज्यादातर कंपनियां प्रीमियम निश्चित करने के लिए आयु के बाद सबसे ज्यादा ध्यान आवेदक के रहन-सहन पर देती हैं। साथ ही किसी पुरानी बीमारी और अनुवांशिक रोग की भी जानकारी आवेदक से अवश्य लेती हैं।
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