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बजट ने बनाया बीमा और आसान

Mon, 04 Mar 2013 02:20 PM IST
नई दिल्ली
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बजट प्रस्तावों के लागू हो जाने के बाद बीमा की दुनिया और आसान हो जाएगी। छोटे शहरों में बीमा कार्यालय न होने के चलते कई बार ग्राहकों को बीमे के भरपूर विकल्प नहीं मिल पाते, न ही आम उपभोक्ता को बाजार की प्रतियोगिता का लाभ मिल पाता है। या यूं कहें कि उसे चुनने की आजादी नहीं मिल पाती। बजट ने इस तरह की समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया है।
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आपके बैंक में ही मिलेंगे कई बीमा कंपनियों के उत्पाद
देश में बीमा इंडस्ट्री व उत्पादों की पहुंच बढ़ाने और उद्योग की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने इस बजट में बैंकों को कई बीमा कंपनियों के उत्पाद के साथ माइक्रो इंश्योरेंस उत्पाद बेचने की भी अनुमति दे दी है। इसका निहितार्थ यह हुआ कि आपके बैंक के पास कई बीमा कंपनियों की पॉलिसियों को बेचने का अधिकार होगा। आपको अपने ही बैंक में बीमा के कई विकल्प मिल जाएंगे और आपको पॉलिसी चुनने की आजादी बढ़ जाएगी।

बीमा कंपनियां आपके द्वार
मौजूदा समय में देश के 100 से अधिक जिले बीमा सुविधाओं से वंचित हैं। सरकारी बीमा कंपनियां भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और साधारण बीमा कंपनियां 10,000 से अधिक आबादी वाले सभी शहरों में एक शाखा खोलेंगी। इससे बीमा सुविधा से वंचित इलाकों में भी लोगों को बीमा की सुविधा मिल सकेगी। इससे सरकारी कंपनियों को कारोबार बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा, बीमा कंपनियों को अब टियर-2 और टियर-3 शहरों में शाखाएं खोलने के लिए बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) की अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। मैग्मा एडीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी के सीईओ स्वराज कृष्णन के अनुसार उनकी कंपनी का प्रमुख जोर छोटे शहरों पर है। ऐसे में कंपनी इन शहरों के ग्राहकों को ऐसी कई सुविधा देने की तैयारी कर रही है, जो ज्यादातर बड़े शहरों के ग्राहकों को मिलती हैं।
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बाजार में आएंगे सस्ते उत्पाद
आने वाले दिनों में बीमा कंपनियां कम लागत वाले बीमा उत्पाद बाजार में उतार सकती हैं। जिसका सबसे ज्यादा फायदा छोटे शहरों के ग्राहकों को मिलेगा। बजाज एलियांज लाइफ इंश्योरेंस के चीफ डिस्ट्रिब्यूशन ऑफीसर एएस नारायण के अनुसार बीमा कंपनियों को डेट स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेडिंग कारोबार की अनुमति मिलना एक अच्छा कदम है। जिसकी वजह से लागत में कमी आएगी। इसका फायदा ग्राहकों को मिल सकता है।

नए उत्पाद आएंगे और बढ़ेंगी नौकरियां
छोटे शहरों के ग्राहकों की जरूरतों को देखते हुए बाजार में नए तरह के उत्पाद आगामी वित्त वर्ष में देखने को मिलेंगे। साथ ही इन शहरों में विस्तार की वजह से नौकरियों में भी इजाफा होगा। मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के सीईओ और एमडी राजेश सूद के अनुसार बीमा कंपनियों को डेट सेगमेंट में सीधे कारोबार करने की अनुमति देने से सेक्टर को अहम फायदा मिलेगा।

बीमा कराने में घटेगा कागजी जरूरतों का सिरदर्द
बीमा खरीदने में केवाईसी यानी नो योर कस्टमर की औपचारिकताएं उपभोक्ताओं को परेशान करती रही है। इस बजट में इसे आसान करने कोशिश की गई है। बजट में कहा गया है कि बीमा पॉलिसी हासिल करने के लिए बैंकों का नो योर क्लाइंट (केवाईसी) प्रमाणपत्र ही पर्याप्त होगा। इससे बीमा सेक्टर में क्लेम में धोखाधड़ी की घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

थर्ड पार्टी क्लेम (मोटर) में आएगी तेजी
फिलहाल देशभर में थर्ड पार्टी ऑटो क्लेम के लगभग 10 लाख मामले लंबित हैं। बीमा कंपनियों के साथ-साथ उपभोक्ताओं के लिए भी यह लंबे समय से सिरदर्द बना हुआ है। बजट में इस मसले पर काफी तवज्जो दी गई है। अब थर्ड पार्टी बीमा का निपटारा आसान हो सकेगा क्योंकि बजट प्रवधान के अनुसार अब इन मामलों का तेजी से निस्तारण करने के लिए बीमा कंपनियां जन अदालतें लगा सकेंगी। इससे इन कंपनियों को क्लेम लागत के मोर्चे पर राहत मिलेगी और उपभोक्ताओं को भी इसका लाभ मिल सकेगा।

वंचित तबके में बढ़ेगा बीमा लाभ का दायरा
अभी तक गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों को ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) का लाभ मिलता था। इसके तहत 3.4 करोड़ कामगारों को लाभ मिला। यह बजट कुछ अन्य श्रेणियों के लिए खुशखबरी लेकर आया है। अब रिक्शा चालकों, ऑटो रिक्शा चालकों, टैक्सी चालकों, सफाई कामगारों, कूड़ा बीनने वालों और खनन कामगारों को भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ मिल सकेगा।
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