डॉक्टर, वकील, कोचिंग संचालक भी नहीं देते हैं सेवा कर
डॉक्टर, वकील, कोचिंग संचालक जिसमें सबसे ज्यादा कमाई होती है, उनसे सरकार सेवा कर की वसूली नहीं करती है। 2012 में कुल आठ लाख लोगों ने अपनी खेती से आय दिखाई थी, जो कि करोड़ों रुपये में थी, हालांकि इस पर किसी तरह का कोई आयकर नहीं देना पड़ा था। अगर इनसे टैक्स वसूला जाने लगे तो फिर वेतनभोगियों पर कर की मार कम पड़ने लगेगी। इस बारे में कई बार विचार किया गया कि बड़े किसानों की आय पर टैक्स लगाया जाए, लेकिन कोई भी सरकार इसके बारे में फैसला नहीं ले पाई है।
सांसद भी नहीं देते हैं कोई टैक्स
देश में संसद सदस्य भी किसी तरह का कोई टैक्स नहीं देते हैं, जबकि वो अपने वेतन के लिए भी खुद निर्णय लेते हैं। सांसदों को साल भर में 34 मुफ्त हवाई यात्रा एक साथी के साथ, ट्रेन के प्रथम श्रेणी में असीमित मुफ्त यात्राएं, मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं, बिना किराये का घर और 20 हजार रुपये मासिक पेंशन के तौर पर मिलते हैं। यह सारा उनको वेतनभोगी के टैक्स से मिलता है। वरिष्ठ नागरिकों को भी इस दायरे में नहीं लाया जाता है।
इन पर मजबूरी में देना होता है कर
आयकर दाताओं को मजबूरी में स्वच्छ पानी, हवा, निजी सुरक्षा और सड़क का इस्तेमाल करने के लिए टैक्स देना होता है। हालांकि यह खर्च करने के बाद भी उनको कुछ बदले में सरकार की तरफ से मिलता नहीं है। विदेशों में जहां सरकारें स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य खर्च खुद वहन करती हैं, वहीं पर टैक्स देने वाले व्यक्ति को भारत में किसी तरह की सरकारी मदद स्वास्थ्य, शिक्षा, नौकरी जाने पर खर्चा या फिर दुर्घटना होने पर नहीं मिलती है।