भारतीय रिजर्व बैंक ने चेक क्लीयरेंस पर लगने वाले जुर्माने पर ग्राहकों को बड़ी राहत दी है।
देश के कई बैंक अभी चेक क्लीयर न होने पर चेक जमा करने वाले ग्राहक और चेक जारी करने वाले ग्राहक दोनों से जुर्माना लेते हैं। कई बार ऐसा होता है कि चेक क्लीयरेंस में एक पक्ष की कोई गलती नहीं होती है।
रिजर्व बैंक के नए नियम के बाद बेवजह ग्राहकों से बैंक कोई जुर्माना नहीं ले सकेंगे। चेक काटने वाले व जमा करने वाले ग्राहकों में से जुर्माना केवल उसी ग्राहक से लिया जाएगा जिसकी गलती होगी।
बैंक इसके लिए ग्राहकों से 100 रुपये से लेकर 750 रुपये तक का जुर्माना लेते हैं।
इसके तहत सरकारी बैंकों के शुल्क निजी बैंकों की तुलना में कम होते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों को जारी किए गए निर्देश के तहत यह कहा गया है कि कई बैंक इस संबंध में ग्राहक की बिना गलती के भी उससे चेक क्लीयर न होने पर जुर्माना लेते हैं, जो सही ग्राहक सेवा नहीं है। ऐसे में बैंक अब इस तरह के शुल्क ग्राहक से नहीं ले सकेंगे।
बैंक ऑफ इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार अभी बैंक चेक क्लीयर न होने पर चेक जमा करने वाले और चेक जारी करने वाले ग्राहक दोनों से जुर्माना लेते हैं। जबकि ज्यादातर मामलों में ऐसा होता है चेक जमा करने वाले ग्राहक की गलती नहीं होती है।
चेक इसलिए नहीं क्लीयर होता है कि जारी करने वाले के खाते में पर्याप्त राशि नहीं है। ऐसे में नए निर्देश के बाद बैंक बेवजह ग्राहकों से जुर्माना नहीं ले सकेंगे।
अधिकारी के अनुसार इस तरह का जुर्माना लेने की शुरुआत निजी बैंकों से हुई थी, जिसके बाद सार्वजनिक बैंक भी जुर्माना लेने लगे।