विश्वदीप मुखर्जी ने 2 लाख रुपये का निवेश करके 20 साल पहले एक प्राइवेट इनवेस्टमेंट कंपनी के शेयर खरीदे थे। वर्तमान में निवेश के तौर पर उनके पास इन शेयरों के अलावा कुछ भी नहीं है। इस कंपनी के सारे शेयर अब एक बिजनेस ग्रुप खरीद रहा है और सुदीप को उनके शेयरों के लिए 30 लाख रुपये देने की बात कंपनी की ओर से कही जा रही है। सुदीप को अपने शेयर बेचने में ऐतराज नहीं, अलबत्ता वह इससे मिलने वाली रकम से अपने लिए एक मकान खरीदने की चाहत रखते हैं। इसके बावजूद उन्हें डर है कि शेयरों की बिक्री पर उन्हें भारी-भरकम टैक्स चुकाना पड़ सकता है। हालांकि शेयर खरीदने वाली कंपनी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि एक साल से अधिक होल्ड करने के बाद बेचे जाने वाले शेयरों पर कोई टैक्स नहीं लगता।
प्राइवेट कंपनी में निवेश पर एसटीटी नहीं
दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ यदि सिक्योरिटी ट्रांजिक्शन टैक्स (एसटीटी) देने के बाद है, तो वह करमुक्त होता है। हालांकि आपका निवेश प्राइवेट कंपनी में है, जिसपर एसटीटी नहीं लगता। ऐसे में आपको लाभ पर कर चुकाना होगा। आपको शेयर की लागत को खरीदे गए वर्ष के कॉस्ट इनफ्लेशन इंडेक्स से भाग कर वित्त वर्ष 2012-13 (जिस वर्ष में शेयर बेचे गए हैं) से गुणा कर अपनी इंडेक्स लागत निकालनी होगी। इस लागत को शेयरों के विक्रय मूल्य (30 लाख रुपये) से घटाकर दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ की गणना करें। इसपर 20 फीसदी की दर से आयकर चुकाना होगा। इस हिसाब से आपको लगभग 5 लाख रुपये का कर अदा करना होगा।
मकान खरीद कर बचाएं टैक्स
अपने ऊपर लगने वाले इस टैक्स को आप मकान खरीद कर बचा सकते हैं। मकान की खरीद से आपकी निवेश, कर तथा रिटायरमेंट तीनों की ही जरूरतें पूरी हो जाएंगी। धारा 54 एफ के तहत आप बेचने की तारीख से एक वर्ष पहले या दो वर्ष बाद तक मकान खरीदें। यदि आप प्लॉट खरीद कर मकान बनवाते हैं, तो बेचने की तिथि से 3 वर्ष तक निर्माण करवा सकते हैं। यदि धारा 139 (1) में रिटर्न फाइल करने की देय तिथि तक नई प्रॉपर्टी में निवेश नहीं किया जाता है, तो इसे अधिकृत बैंक ब्रांच में कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम 1988 में रिटर्न फाइल करने की देय तिथि तक जमा करें और उसका निर्धारित समय में निवेश में प्रयोग करें। ध्यान रहे इस निवेश के बाद आप अगले 2 वर्षों में कोई नया मकान नहीं खरीद सकते और न ही अगले 3 वर्षों में नए मकान का निर्माण करवा सकते हैं। यदि ऐसा करते हैं, तो क्लेम की गई करमुक्तता पर आपको टैक्स देना होगा। इस निवेश पर आनुपातिक करमुक्तता मिलती है। यानी कि नए मकान पर निवेश को पूंजीगत लाभ से गुणा कर और विक्रय मूल्य से भाग कर करमुक्तता की गणना की जाती है।