फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रिफंड की राह में आने वाली पांच बड़ी अड़चनें

विज्ञापन
विज्ञापन
आयकर रिटर्न समय पर दाखिल करने के बाद करदाता को इस बात का इंतजार रहता है कि आयकर विभाग की ओर से कब उसे उसके द्वारा चुकाई गई करदेयता से अधिक राशि का रिफंड मिलेगा। कई बार यह इंतजार एक अंतहीन प्रतीक्षा बनकर रह जाता है और आय करदाता को रिफंड नहीं मिल पाता।
विज्ञापन


कभी-कभी करदाता का रिफंड किसी विभागीय प्रक्रिया के पेंच में फंस जाता है, पर कई बार आयकर रिटर्न दाखिल करने के दौरान हुई किसी चूक के चलते भी रिफंड का भुगतान नहीं हो पाता। आयकर रिटर्न फार्मों की पड़ताल करने पर आयकर विशेषज्ञों ने पाया है कि अकसर करदाता की ओर से की गई कुछ निश्चित भूलों के चलते उसे रिटर्न नहीं मिल पाता। रिटर्न न मिलने की पांच अहम वजहें इस प्रकार हैं-

टीडीएस विवरण में गड़बड़ी
रिफंड की राह में सबसे पहली बाधा बनती है करदाता द्वारा फार्म में दिए गए टीडीएस संबंधी विवरण में की गई गलती। कई बार फार्म में दिया गया विवरण आवेदक के फार्म 16 या फार्म 16 ए में दिए गए विवरण या आयकर विभाग के पास दर्ज विवरणों से मेल नहीं खाता है। इसके चलते करदाता के रिफंड का भुगतान लटक जाता है।
विज्ञापन


फार्म में पता गलत होना
रिफंड न मिल पाने की सबसे आम वजहों में आयकर फार्म में करदाता का पता गलत होना पाया गया है। कई बार करदाता आयकर रिटर्न फार्म भरते वक्त जल्दबाजी में या भूलवश पता गलत भर देते हैं। ऐसा होने पर आयकर विभाग द्वारा रिफंड जारी किए जाने के बावजूद यह उनके पास नहीं पहुंच पाता और वह इसके लिए इंतजार ही करते रह जाते हैं।

बैंक खाते का विवरण न देना
आयकर का रिफंड सीधे अपने खाते में प्राप्त करने के लिए जरूरी है कि करदाता रिटर्न दाखिल करते वक्त आयकर फार्म में अपने बैंक खाते का विवरण, खाता संख्या और उसके एमआईसीआर (मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रिकग्निशन) कोड का सही विवरण अपने आयकर रिटर्न फार्म में भरे। इसमें गड़बड़ी या विसंगति रहने के कारण भी कई बार रिफंड भुगतान रुका रहता है।

ITR-V समय से न दाखिल करना
ऑनलाइन रिटर्न फाइल करने के मामले में रिफंड तब तक नहीं बनाया जाता, जबकि करदाता का ITR-V बंगलूरू स्थित आयकर विभाग के सीपीसी (सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर) कार्यालय में नहीं पहुंच जाता। इसलिए ऑनलाइन आवेदकों के लिए ITR-V फार्म भरकर समय पर भेज देना चाहिए, ताकि यह तयशुदा अवधि के भीतर सीपीसी पहुंच जाए।

टीडीएस दावों की भारी संख्या
हर साल आयकर विभाग को भारी तादाद में टीडीएस रिफंड के दावे आयकर रिटर्न के तहत प्राप्त होते हैं। दावों की भारी-भरकम संख्या के चलते जाहिर तौर पर कई बार इनके निपटारे में लंबा समय लग जाता है। ऐसे में आय करदाताओं को अपना रिफंड प्राप्त करने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। कई बार कुछ लोगों का रिफंड फंसा भी रह जाता है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें