कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की योजनाओं का फायदा उठाने के लिए इसके सदस्यों को अब आधार कार्ड की जरूरत नहीं होगी।
ये योजनाएं प्रत्यक्ष लाभ या नकद हस्तांतरण योजना (डीबीटी) के तहत लागू की जाने वाली स्कीमों की सूची के दायरे से बाहर कर दी गई हैं।
संगठन के इस फैसले से इसके पांच करोड़ सदस्य प्रभावित होंगे। श्रम मंत्रालय द्वारा ईपीएफओ के केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त को भेजे एक पत्र से यह जानकारी सामने आई है।
मंत्रालय के मुताबिक, ‘ईपीएफओ और ईएसआईसी के तहत आने वाली योजनाएं नकद हस्तांतरण योजना के तहत लागू की जाने वाली स्कीमों की सूची से बाहर कर दी गई हैं।’
मंत्रालय के इस फैसले के बाद ईपीएफओ के मुख्यालय ने भी संबंधित कार्यालयों को पत्र भेजकर क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा डीबीटी के तहत किए जाने वाले कार्यों की मासिक प्रगति रिपोर्ट सौंपने पर रोक लगा दी है।
संगठन के एक अधिकारी के मुताबिक ईपीएफओ की योजनाएं डीबीटी से इसलिए बाहर कर दी गई हैं कि डीबीटी महज सब्सिडी और अनुदान को बांटने के लिए है जबकि पीएफ का पैसा सब्सिडी के तहत नहीं आता है।
इसी साल जनवरी में ईपीएफओ ने अपने फील्ड स्टाफ से 1 मार्च, 2013 को या इसके बाद नए बने सदस्यों और 30 जून, 2013 तक सभी पुराने सदस्यों के आधार आंकडे़ एकत्र करने को कहा था।
बाद में फरवरी में जारी अपने नए निर्देश में ईपीएफओ ने आधार संख्या अनिवार्य करने का अपना फैसला स्थगित कर दिया था।
ईपीएफओ का मानना था कि आधार संख्या हासिल करने में काफी समय चला जाता है और वैसे भी आधार कार्ड से जुड़ी स्कीमें अभी केवल देश के 18 राज्यों में ही लागू है।