इन दिनों विभिन्न संस्थान अपने कर्मचारियों को हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा उपलब्ध कराते हैं। निश्चित तौर पर सीमित आय वाले कर्मचारियों के लिए यह पहल काफी राहत देने वाली है। इसके बावजूद, नौकरीपेशा हर शख्स को हेल्थ कवर को लेकर और एहतियात बरतने की जरूरत है।
कंपनी की ओर से मिले हेल्थ कवर के बावजूद हर कर्मी को अलग से अपनी एक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी रखनी चाहिए। क्योंकि, यदि नौकरीपेशा व्यक्ति अपने वर्तमान संस्थान से इस्तीफा देता है, तो अलग से ली गई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी जरूरत पर उसके काम आ सके।
बीमा विशेषज्ञ अलग से हेल्थ इंश्योरेंस लेने की सलाह दीर्घकालीन परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखकर देते हैं। जैसेकि, मान लीजिए कोई व्यक्ति 50 या 55 साल की उम्र में अपनी नौकरी बदलता है, तो उस समय हेल्थ इंश्योरेंस की प्रीमियम बहुत अधिक होगी और यदि वह व्यक्ति इंश्योरेंस लेने में सक्षम भी है तो उसे कुछ मेडिकल परीक्षणों से भी गुजरना होगा। इसके बाद ही संबंधित बीमा कंपनी उस शख्स को हेल्थ कवर देगी।
दूसरी ओर, जिन लोगों को उनके नियोक्ता की ओर से हेल्थ कवर मिला है, उन्हें अपने और निर्भर मां-बाप के लिए अलग से हेल्थ इंश्योरेंस भी खरीदना लाभकारी होगा। क्योंकि, एक निश्चित उम्र के बाद बीमा कंपनी नौकरीपेशा व्यक्ति के मां-बाप के हेल्थ कवर के आवेदन को स्वीकार नहीं करती, यदि करती भी है तो उसका प्रीमियम बहुत ही अधिक होगा।
इसके अतिरिक्त, पिछले साल अक्तूबर में आई हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी ने संस्थान बदलने पर कंपनी के हेल्थ कवर को एकल रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में स्थानांतरित कराने का विकल्प भी कर्मचारी को उपलब्ध करा दिया है।
- मायडिजिटलएफसी डॉट कॉम