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Passport Racket: फर्जी पासपोर्ट केस में बंगाल-सिक्किम से चार बिचौलिए गिरफ्तार, CBI की रडार पर नेपाली कनेक्शन

Tue, 17 Oct 2023 07:52 PM IST
निर्मल कांत बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Passport Racket: सीबीआई ने चार ऐसे बिचौलियों को गिरफ्तार किया है, जो पासपोर्ट विभाग के अधिकारियों से जुड़े एक रैकेट का हिस्सा थे। इस रैकेट ने कथित तौर पर जाली दस्तावेजों के आधार पर नेपाली नागरिकों को साठ से अधिक भारतीय पासपोर्ट जारी किए थे।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने चार ऐसे बिचौलियों को गिरफ्तार किया है, जो पासपोर्ट विभाग के अधिकारियों से जुड़े एक रैकेट का हिस्सा थे। इस रैकेट ने कथित तौर पर जाली दस्तावेजों के आधार पर नेपाली नागरिकों को साठ से अधिक भारतीय पासपोर्ट जारी किए थे। इससे 46 लाख रुपये से अधिक नकद जब्त किए गए थे। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। 

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उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में रैकेट में नेपाली कनेक्शन का पता चला है। सीबीआई ने इस मामले में सचिन राय, बरुण सिंह राठौड़, उदय शंकर रॉय और सुब्रत साहा को गिरफ्तार किया है। एजेंसी ने गंगटोक के पासपोर्ट लघु सेवा केंद्र (पीएलएसके) में वरिष्ठ अधीक्षक के पद पर तैनात गौतम कुमार साहा और एजेंट दीपू छेत्री को शनिवार को सिलिगुड़ी के एक होटल से गिरफ्तार किया था। एजेंट दीपू छेत्री पासपोर्ट जारी करने के लिए कथित तौर पर 1.9 लाख रुपये की रिश्वत दे रहा था।

अधिकारियों ने बताया कि तलाशी के दौरान सीबीआई ने 46 लाख रुपये से अधिक की नकदी और भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के लिए इस्तेमाल किए गए जाली दस्तावेजों का जखीरा जब्त किया। सभी आरोपियों को 20 अक्तूबर तक सीबीआई की हिरासत में भेज दिया गया है। 

एजेंसी ने आरोप लगाया है कि राय और राठौड़ जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और शैक्षिक प्रमाण पत्र जैसे भारतीय पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल करके नेपाली नागरिकों की ओर से पासपोर्ट के लिए आवेदन करते थे। रॉय और सुब्रत साहा ने कथित तौर पर अपने तकनीकी कौशल का इस्तेमाल करके दस्तावेजों को तैयार करने में उनकी मदद की।

सीबीआई ने मुख्य रूप से कोलकाता के क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (आरपीओ) के 16 सरकारी अधिकारियों को नामजद किया था, जिन्होंने एजेंटों द्वारा नियमित रूप से भुगतान की जाने वाली भारी रिश्वत के बदले में जाली दस्तावेजों के आधार पर नेपाली नागरिकों को 60 से अधिक भारतीय पासपोर्ट जारी किए थे। 

एक अधिकारी ने बताया कि इन एजेंटों ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने, पुलिस सत्यापन और दस्तावेजों की आपूर्ति समेत पासपोर्ट प्रक्रिया के हर कदम में कथित तौर पर हेरफेर किया और नेपाली नागरिकों को भारतीय पासपोर्ट जारी कर रहे थे, जिससे सुरक्षा का गंभीर मुद्दा पैदा हो गया।

सीबीआई ने शनिवार को पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 50 स्थानों पर छापेमारी के बाद पासपोर्ट विभाग के अधिकारियों और बिचौलियों से जुड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया। एजेंसी ने कोलकाता आरपीओ और गंगटोक पीएलएसके के अधिकारियों द्वारा महज दो महीने में उपलब्ध कराए गए जाली दस्तावेजों के आधार पर ऐसे 60 से अधिक पासपोर्ट आवेदनों को मंजूरी देने के लिए अवैध भुगतान का पता लगाया है।

राय और राठौड़ ने दार्जिलिंग और पीएलएसके गंगटोक में डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र में आवेदन जमा किए। पीएलएसके गंगटोक में तैनात सचिन कुमार ने कथित तौर पर एजेंटों और अधिकारियों के बीच एक सेतु के रूप में काम किया। 

अधिकारियों ने बताया कि एजेंटों ने आवेदनों को आगे बढ़ाने और पासपोर्ट जारी कराने के लिए कुमार को फाइल नंबर सौंप दिए। उन्होंने बताया कि कुमार ने पीएलएसके गंगटोक और आरपीओ कोलकाता के अधिकारियों के साथ मिलकर दस्तावेजों की जांच, सत्यापन और व्यक्तिगत उपस्थिति की प्रक्रिया का कथित तौर पर प्रबंधन किया।

कोलकाता के क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय के अधिकारियों को आवेदनों के सत्यापन के लिए बारी-बारी से हर महीने गंगटोक पीएलएसके में तैनात किया जाता है। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि राय, राठौड़ और एक अन्य एजेंट अजय चौधरी आमतौर पर पुलिस सत्यापन का प्रबंधन करते थे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद, पासपोर्ट जारी किए गए और डाक द्वारा भेजे गए। प्राथमिकी में कहा गया है, 'चूंकि पासपोर्ट आवेदनों में दिए गए पते झूठे हैं, इसलिए जारी किए गए पासपोर्ट डाक द्वारा भेजे जाने पर व्यक्तिगत आवेदकों को इन पतों पर वितरित नहीं किए जा सकते हैं।'

इसमें आरोप लगाया गया है कि कुमार की सलाह पर राय और राठौड़ ने बागडोगरा उप डाकघर में तैनात एक डाकिया पप्पू सलानी के साथ मिलीभगत की, जिसने पासपोर्ट भेजने में उल्लिखित पते पर पहुंचाने के बजाय एजेंटों को पासपोर्ट सौंप दिए। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है, 'व्यक्तिगत आवेदक नेपाल के नागरिक हैं जो बाद में भारत आते हैं और सचिन राय और बरुण सिंह राठौड़ से शरारतपूर्ण तरीके से जारी किए गए भारतीय पासपोर्ट लेते हैं।'
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एक बार प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद कुमार बिचौलियों भरत मान लिंबू और चंदन प्रधान के माध्यम से राय और राठौड़ से रिश्वत था। इसमें कहा गया है कि कोलकाता आरपीओ और गंगटोक पीएलएसके के अधिकारियों के बीच धन या तो प्रत्यक्ष वितरण के माध्यम से या आरोपी लोक सेवकों के सहयोगियों के खातों में बैंक हस्तांतरण के माध्यम से वितरित किया गया था।
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