त्योहारी सीजन के दौरान भारी छूट पर उत्पादों की बिक्री को लेकर अमेजन और वालमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट भारत सरकार के रडार पर आ गई हैं। सरकार जांच कर रही है कि भारी छूट से कहीं विदेश निवेश से जुड़े नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है। वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है।
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते ही इस मसले पर चर्चा के लिए वाणिज्य मंत्रालय के सामने अमेजन, फ्लिपकार्ट और सीएआईटी के प्रतिनिधियों की बैठक हुई थी। सीएआईटी के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, ‘भारी छूट के कारण ग्राहक ऑनलाइन खरीदारी कर रहे हैं। इसके चलते इस महीने खुदरा कारोबारियों की बिक्री 30 से 40 फीसदी कम हुई है।’
सितंबर में फ्लिपकार्ट के विक्रेताओं से मिले दो ईमेल्स के मुताबिक, त्योहारी सीजन से ठीक कुछ दिन पहले कंपनी ने डिस्काउंट्स के आंशिक भुगतान की पेशकश की थी। एक ई-मेल के मुताबिक, ‘यदि विक्रेता उत्पाद की कीमत 15 फीसदी कम करता है तो उसमें से 3 फीसदी या 30 फीसदी छूट की स्थिति में 9 फीसदी का बोझ कंपनी उठाएगी।’ फ्लिपकार्ट से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि सभी प्रोत्साहन भारतीय नियमों के तहत हैं और इनका उद्देश्य उनके द्वारा चुकाए जाने वाले कमीशन में कमी लाकर विक्रेताओं को कमाई के लिए प्रोत्साहित करना है।
ऑल इंडिया ऑनलाइन वेंडर्स एसोसिएशन ने एक बयान में कहा कि उसके लगभग 100 सदस्यों ने फ्लिपकार्ट की आंशिक छूट का फायदा उठाया है, जिससे कुछ विक्रेताओं को अनुचित फायदा हो रहा है। इस संगठन के 3,500 सदस्य हैं, जिनमें से कई फ्लिपकार्ट से जुड़े हुए हैं।