निष्पक्ष होगी बिक्री
विशेषज्ञ के अनुसार नए नियमों में निष्पक्ष तरीके से बिक्री की बात कही गई है। ऐसे में कोई भी ई-कॉमर्स पर चुनिंदा विक्रेता व्यक्तिगत तौर पर कैशबैक ऑफर नहीं दे सकेंगे। किसी भी ब्रांड और ई-मार्केट प्लेस के बीच ऑनलाइन होने वाले विशेष सौदेबाजी पर पाबंदी लगा दी गई है।
कोई ब्रांड अपना माल सिर्फ एक ही प्लेटफॉर्म यानी फ्लिपकार्ट या अमेजन पर भारी छूट के साथ नहीं बेच सकेगा। उपभोक्ताओं को तत्काल या जल्द सामग्री भेजने जैसे ऑफर पेश करने वाली सेवाओं को भी भेदभावपूर्ण माना जाएगा।
सिर्फ बीटूबी में 100 फीसदी एफडीआई
नए नियम में सरकार ने स्पष्ट किया है कि ई-कॉमर्स के बिजनेस-टू-बिजनेस मॉडल में ही ऑटोमैटिक रूट के जरिये 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति है। माना जा रहा है कि विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों ने इस नियम की समय-सीमा बढ़वाने की तमाम कोशिशें की, लेकिन खुदरा व्यापारियों के दबाव ने इन प्रयासों को नाकाम कर दिया।
घरेलू कंपनियों को लाभ
विशेषज्ञ यह मानते हैं कि इन नियमों से खुदरा और देसी ई-कॉमर्स कंपनियों को लाभ होगा, लेकिन तेजी से बढ़ रहे इस क्षेत्र की गति कम हो जाएगी। भारत में ई-कॉमर्स क्षेत्र में साल 2023 तक 10 लाख नौकरियां आएंगी, जबकि साल 2020 तक भारत में सालाना ई-कॉमर्स व्यवसाय से होने वाली बिक्री 7 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। वहीं, यह आंकड़ा साल 2026 तक 14 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है। अभी यह क्षेत्र सालाना 51 फ़ीसदी की दर से बढ़ रहा है।