नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने तारीफ की है। उन्होंने कहा इस बार के आम बजट के सामने सबसे बड़ी चुनौती ठहरी हुई अर्थव्यवस्था को गति देने और देश की अर्थव्यवस्था के प्रति दुनिया का विश्वास बनाए रखने की थी। बजट में किए गए उपायों और घोषणाओं से ये दोनों ही उद्देश्य पूरे हुए हैं।
सरकार ने एक तरफ पूंजी व्यय (कैपिटल एक्पेंडीचर) बढ़ाने का साहस दिखाया है, तो दूसरी ओर तेज आर्थिक सुधार का रास्ता साफ किया है। विनिवेश, स्टार्टअप और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी रकम खर्च करने की घोषणा कर सरकार ने अर्थव्यवस्था, विकास दर में मजबूती के साथ भविष्य में रोजगार के अवसर बढ़ाने का भी रास्ता साफ किया है।
बड़ी बात यह है कि सरकार ने वित्तीय घाटे के बावजूद खर्च करने में कोताही नहीं बरतने का संदेश दिया है। तेज गति से विनिवेश को हरी झंडी दिखाने से विदेशी निवेश की मजबूत संभावना बनने का रास्ता साफ हुआ है। खासतौर से बीमा क्षेत्र में विनिवेश की सीमा को 49 फीसदी से 74 फीसदी बढ़ाने से इस क्षेत्र में प्रतियोगिता बढ़ेगी। इससे बीमा कंपनियों, देश और उपभोक्ता तीनों के हित सधेंगे।
बजट प्रावधानों और घोषणाओं पर बारीकी से नजर दौड़ाएं तो साफ है कि सरकार की प्राथमिकता उच्च विकास दर का लक्ष्य हासिल करना है। सरकार आने वाले समय में सात से नौ फीसदी का विकास दल हासिल करना चाहती है।
आम बजट से इस लक्ष्य को हासिल करने का रास्ता साफ होगा। जहां तक सवाल रोजगार का है, तो रुकी हुई आर्थिक व्यवस्था रोजगार नहीं दे सकती। बजट प्रावधानों से अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी। और यही तेजी नए-नए रोजगार के अवसर प्रदान करेगा।
संकुचित मार्ग नहीं अपना सकते
जहां तक आर्थिक सुधार का सवाल है तो इसमें संकुचित मार्ग नहीं अपनाया जा सकता। संकुचित मार्ग के कारण उत्पन्न अस्पष्टता से अर्थव्यवस्था को सुधार का लाभ नहीं मिलता। अब इस आम बजट में सरकार ने सुधारों के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्ध्ता दर्शाई है।
जाहिर तौर पर निवेश के क्षेत्र में इसका व्यापक असर भविष्य में देखने को मिलेगा। बजट में अहम निर्णय स्टार्टअप को ले कर है। प्रधानमंत्री ने हाल ही में स्टार्टअप्स के वित्त पोषण के लिए दस हजार रुपये के कोष की स्थापना की घोषणा की थी। इसके बाद इस बजट में इस क्षेत्र की जटिलताओं को दूर करने और नई सुविधाएं-राहत देने के लिए अहम घोषणा की गई है।
उम्मीदों के अनुरूप व्यवहारिक और प्रगतिशील बजट: अमिताभ कांत सीईओ, नीति आयोग
विकास दर में तेज गिरावट और कोरोना काल में अर्थव्यवस्था पर बुरी मार के बावजूद न नया कर और न ही नया सेस। वर्तमान परिस्थितियों में इससे बेहतर बजट की उम्मीद नहीं की जा सकती थी।
बजट में की गई घोषणा और जताई गई प्रतिबद्ध्ता से साफ है कि सरकार निजी क्षेत्र को भी विकास का भागीदार बनाना चाहती है। सुधार के इस युग में निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित किए बिना आर्थिक लक्ष्यों को हासिल नहीं किया जा सकता।
बजट में बुनियादी ढांचे में मजबूती और संपत्ति के मुद्रीकरण पर जोर दिया गया है। निश्चित तौर पर अर्थव्यवस्था के लिए आर्थिक सुधार आवश्यक है। सरकार ने बजट के माध्यम से इसे ओर मजबूती से आगे बढ़ने का साफ संदेश दे दिया है। मुझे लगता है कि यह बजट व्यवहारिक, तर्कसंगत और प्रगतिशील है। बुनियादी ढांचे में मजबूती के जरिये लक्ष्य विकास दर और अर्थव्यवस्था में मजबूती लाने का है। रोजगार सृजन के लिए इस शर्त को पूरा करना जरूरी है।
देश की अर्थव्यवस्था कोरोना के दिए जख्म से उबर रही है। कोरोना से उबरने के इस दौर में यह बजट अगले तीन चार साल तक अर्थव्यवस्था को नई और बेहतर दिशा देगा। देश और देश की अर्थव्यवस्था को इसी तरह के शानदार और व्यवहारिक बजट की जरूरत थी।