आम बजट को लेकर आस लगाए बैठे मध्यम वर्ग की उम्मीदों पर काफी हद तक बजट खरा उतरा है। बजट में 3 लाख रुपये तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं है। पहले ये सीमा ढाई लाख रुपये तक की थी। वेतनभोगी मध्यवर्गीय परिवार 5 लाख रुपये तक की तक कमाई पर टैक्स की छूट की उम्मीद लगाए बैठा था, ताकि उनकी बचत हो सके। अब हम आपके सामने 3 केस रख रहे हैं जिनके जरिए आप समझ सकते हैं कि कितना टैक्स इन परिवारों को बचेगा और आप भी कितना टैक्स बचा पाएंगे।
केस-1
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सेक्टर-11 निवासी पुनीत पाराशर कंसलटेंट हैं। परिवार में पत्नी, दो बच्चे और पिता हैं। छोटा बेटा दूसरी कक्षा और बड़ा बेटा 8वीं कक्षा में पढ़ाई करता है। हर महीने इनकी शिक्षा पर 18000 रुपये खर्च होते हैं। इनकी कमाई का बड़ा हिस्सा शिक्षा और हाउसिंग पर ही खर्च होता है। जिस वजह से अन्य खर्च करते वक्त पुनीत को हाथ सिकोड़ने पड़ते हैं।
नए टैक्स स्लैब से इतना होगा फायदा
वर्ष 2016 प्रतिशत 2017 प्रतिशत
वेतन 65000 70000
शिक्षा 16000 24.61 18000 25.71
परिवहन 2500 3.84 3000 4.28
हाउसिंग 25000 38.46 26000 37.14
बीमा 3000 4.61 3000 4.28
मेडिकल 2000 3.07 2000 2.85
एंटरटेनमेंट 1500 2.30 2000 2.85
रिटायरमेंट 3000 4.61 3000 4.28
खान-पान 5000 7.69 6000 8.57
बचत 2000 3.07 1000 1.42
टैक्स 4000 6.15 5000 7.14
अन्य 1000 1.53 1000 1.42
अरोड़ा परिवार को हुई निराशा
अरोड़ा फैमिली
केस---2
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नगर निगम फरीदाबाद से रिटायर हुए एनआईटी एक में रहने वाले आनंद कुमार अरोड़ा के संयुक्त परिवार की उम्मीदों पर वित्तमंत्री अरुण जेटली का बजट खरा नहीं उतरा। अरोड़ा के संयुक्त परिवार में 10 सदस्य हैं। पत्नी हर्ष अरोड़ा घर संभालती हैं, जबकि बेटे अमित और जतिन पेंट की दुकान चलाते हैं। अमित की पत्नी रिचा अरोड़ा निजी कंपनी में जॉब करती हैं तो जतिन की पत्नी हाउस वाइफ हैं। आनंद अरोड़ा के परिवार की संयुक्त आमदनी 45 से 50 हजार रुपये प्रतिमाह है। इस कमाई में 4 बच्चों की पढ़ाई, इलाज, राशन, मनोरंजन, सामाजिक-धार्मिक कार्यकलाप आदि बड़े खर्चे हैं। इतने खर्चों के बाद मुश्किल से ही कुछ बचत हो पाती है।
प्रत्यक्ष कर छूट में फायदा नहीं
रंगों का कारोबार करने वाले अमित अरोड़ा कहते हैं कि नोटबंदी से सरकार को राजस्व में 34 फीसदी का इजाफा हुआ है। आम आदमी को उम्मीद थी कि इंकम टैक्स में 5 लाख रुपये तक की आमदनी पर छूट दी जाएगी लेकिन कोई खास बदलाव नहीं किया गया। ढाई से पांच लाख रुपये स्लैब में कर छूट 10 से घटा कर 5 फीसदी की गई है। रुपये की परचेजिंग पावर जिस तरह से घटी है उससे पांच फीसदी छूट का कोई महत्व नहीं रह जाता।
कम नहीं हुआ सर्विस टैक्स
सेवानिवृत्त आनंद अरोड़ा कहते हैं कि कैशलेस इकोनॉमी की ओर बढ़ रही सरकार को सर्विस टैक्स कम करना चाहिए था। सर्विस टैक्स की वजह से कीमत वैसे ही 15 फीसदी बढ़ जाती है। यह सेवा कर गरीब, अमीर सबको बराबर देना पड़ता है। अमीरों के लिए तो यह कर चुकाना मुश्किल नहीं है लेकिन गरीबों के लिए झटके से कम नहीं। सेवाकर कम होने से पेंशन पाने वालों को कुछ राहत मिल जाती।
बच्चों की फरमाइश हर माह पूरी करना मुश्किल
अमित की पत्नी रिचा अरोड़ा कहती हैं कि महंगाई की वजह से पूरा परिवार दो-ढाई माह बाद ही वीकेंड मनाने किसी होटल या रेस्त्रां में जाता था। बजट में कुछ मिलने की उम्मीद थी लेकिन कुछ खास फर्क नहीं पड़ा। बच्चों को रेस्त्रां में खाने की फरमाइश के लिए उतना ही इंतजार करना होगा।
बचत करना है मुश्किल
आनंद अरोड़ा की पत्नी हर्ष अरोड़ा कहती हैं कि घर का खर्च ही इतना है कि बचत के लिए बचाना मुश्किल होता है। यदि महीने में कोई रिश्तेदार आ जाए तो खर्च अपने आप बढ़ जाता है। क्योंकि सामाजिक रिश्ते भी निभाने जरूरी हैं। अमीर पर तो कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन आम आदमी पर इसकी मार अधिक पड़ेगी। बजट से साफ है कि आमजन के अच्छे दिन नहीं आने वाले।
किस मद में कितना खर्च:
मद 2016 2017
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शिक्षा 130000 135000
परिवहन 60000 67000
हाउसिंग लोन 110000 110000
इंश्योरेंस खर्च 40000 48000
मनोरंजन खर्च 25000 30000
खानपान खर्च 30000 36000
टैक्स 7000 7000
यात्रा खर्च 25000 30000
बिजली खर्च 60000 66000
मोबाइल 3000 3500
अन्य 5000 6000