एलआईसी की नेट प्रीमियम आय 1,44,158.84 करोड़ रुपये हो गई है, जो एक साल पहले इसी तिमाही में 1,22,290.64 करोड़ रुपये थी। शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद बीमा कंपनी की ओर से यह पहला आय विवरण जारी किया गया है, जिसमें उसके मुनाफे पर काफी बुरा असर हुआ है। वहीं, दूसरी ओर कंपनी के बोर्ड ने अपने निवेशकों को 1.50 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड देने का फैसला किया है।
2,409.39 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट
भारत के सबसे बड़े बीमाकर्ता जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने सोमवार को मार्च 2022 को समाप्त तिमाही के लिए 2,409.39 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो इसी अवधि में दर्ज 2,917.33 करोड़ रुपये से 17.41 प्रतिशत कम है। वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए सरकार द्वारा संचालित बीमाकर्ता ने 4,043.12 करोड़ रुपये का नेट पोस्ट किया जो कि 2020-21 में दर्ज 2,900.56 करोड़ रुपये की तुलना में 39.4 प्रतिशत अधिक है।
मार्च 2022 को समाप्त वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में एलआईसी का कुल राजस्व साल दर साल 11.64 प्रतिशत बढ़कर 2,11,471 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वर्ष की इसी तिमाही में यह 1,89,176 करोड़ रुपये था। एलआईसी बोर्ड ने सोमवार को हुई अपनी बैठक में 31 मार्च, 2022 को समाप्त तिमाही और वर्ष के वित्तीय परिणामों को मंजूरी दी। एलआईसी ने अपने निवेशकों के लिए 1.50 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड देने का फैसला किया है। कंपनी के नतीजे मार्केट बंद होने के बाद आए हैं। एलआईसी के शेयर आज BSE पर 1.81 फीसदी की तेजी के साथ 836.50 रुपये पर बंद हुए थे।
शेयरों का भाव 15 फीसदी तक गिर चुका है
बता दें कि आईपीओ के इश्यू प्राइस से अब तक एलआईसी के शेयरों का भाव 15 फीसदी तक गिर चुका है। कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग 17 मई को हुई थी। एलआईसी का आईपीओ देश का अब तक का सबसे बड़ा इश्यू था। कंपनी का इश्यू सिर्फ 6 गुना ही सब्सक्राइब हो पाया है। एलआईसी के इश्यू में रिटेल इनवेस्टर्स और इंस्टीट्यूशनल बायर्स ने जमकर बोली लगाई थी, जबकि विदेशी निवेशकों ने इस आईपीओ में कुछ खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। सरकार ने इश्यू के जरिए एलआईसी में 3.5 फीसदी हिस्सेदारी यानी 22.13 करोड़ शेयर बेचे थे।