साकेत डालमिया ने कहा, सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के प्रयासों ने थोक कीमतों में वृद्धि को खासतौर पर प्रभावित किया है। उद्योग निकाय के प्रमुख ने कहा कि दिसंबर तक महंगाई छह फीसदी से नीचे जा सकती है।
पीएचडी चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के प्रमुख साकेत डालमिया ने बुधवार को कहा कि महंगाई सितंबर 2022 में घटकर 10.7 फीसदी पर आ गई, जो जून 2022 में 16.2 फीसदी थी। उन्होंने कहा कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के प्रयासों ने थोक कीमतों में वृद्धि को खासतौर पर प्रभावित किया है। उद्योग निकाय के प्रमुख ने कहा कि दिसंबर तक महंगाई छह फीसदी से नीचे जा सकती है।
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डालमिया ने कहा, हालांकि आरबीआई ने महंगाई पर काबू पाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया और पिछले छह महीनों के दौरान रेपो रेट में 190 बेसिक पॉइंट्स की वृद्धि करते हुए अक्तूबर में 4.4 फीसदी से 5.9 फीसदी की वृद्धि की। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर को भी बनाए रखा गया है।
उन्होंने आगे कहा, कई अर्थव्यवस्थाएं ज्यादा आक्रामक थीं जिन्होंने पॉलिसी रेट को बढ़ाया। जैसे कनाडा ने 300 बेसिक पॉइंट्स के साथ पॉलिसी रेट में वृद्धि की। इसके बाद अमेरिका ने 275 बेसिक पॉइंट्स, ऑस्ट्रेलिया ने 250 बेसिक पॉइंट्स, ब्रिटेन ने 175 बेसिक पॉइंट्स, दक्षिण अफ्रीका ने 225 बेसिक पॉइंट्स और यूरोपीय हिस्से ने 200 पॉइंट्स के साथ पॉलिसी रेट में वृद्धि की।
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पीएचडीसीसीआई ने कहा, कनाडा रेपो रेट 300 बेसिक पॉइंट बढ़ाकर महंगाई दर को 120 बेसिक पॉइंट तक कम करने में सफल रहा था। अमेरिका फेडरल रिजर्व रेट में 275 बेसिक प्वाइंट की बढ़ोतरी कर महंगाई दर को 9.1 फीसदी से घटाकर 8.2 फीसदी करने में सक्षम है। दक्षिण अफ्रीका पॉलिसी रेट में 225 बेसिक पॉइंट्स की वृद्धि करके मुद्रास्फीति दर को 7.8 फीसदी से घटाकर 7.5 फीसदी करने में सक्षम है। भारत पॉलिसी रेट में 190 बेसिक पॉइंट्स की वृद्धि करके मुद्रास्फीति दर को 7.8 फीसदी से घटाकर 7.4 फीसदी करने में सक्षम है।