सरकार का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित शक्ति और यहां निवेशकों को मिलने वाले लाभ के चलते यह विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक केंद्र बना रहेगा। जहां तक मॉरीशस के होने वाले निवेश पर पूंजीगत लाभ कर लगाने की बात है तो दुनिया में कहीं भी ऐसा निवेश करमुक्त नहीं है। साथ ही कहा कि देशी निवेशकों को लेवल प्लेइंग फील्ड उपलब्ध कराने के लिए ऐसा किया जाना जरूरी है।
वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने बुधवार को संवाददाताओं के साथ बातचीत में कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय, कर मुक्त प्रणाली वाले देशों से दूर जा रहे हैं। उनके मुताबिक भारत उल्लेखनीय अर्थव्यवस्था बना हुआ है और यहां निवेश, अर्थव्यवस्था के बुनियादी कारकों, अर्थव्यवस्था की मजबूती और लचीलेपन के कारण आएगा और भारत में कर पश्चात मुनाफे की बेहतर संभावनाओं को देखते हुए आएगा।
डीटीएए के उल्लंघन पर लागू होगा गार
बढ़ रहा है विदेशी निवेश
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दास ने कहा कि शून्य कर का प्रावधान, नुकसानदेह कर व्यवहार को प्रोत्साहन देता है जो वैश्विक समुदाय के हित में नहीं है। यही नहीं, इससे घरेलू निवेशकों का हित भी प्रभावित होता है क्योंकि उन्हें एक लेवल प्लेइंग फील्ड नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि पूंजीगत लाभ पर कर पूरी दुनिया में लगता है। किसी निवेशक को घरेलू निवेशकों के मुकाबले सिर्फ इसलिए विशेष लाभ नहीं मिलना चाहिए कि वह किसी विशेष मार्ग से निवेश कर रहा है।
मॉरीशस के साथ द्विपक्षीय कर संधि में संशोधन के एक दिन बाद वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जब दोहरे कराधान से बचाव के समझौते (डीटीएए) के प्रावधानों का उल्लंघन किया जाएगा, तब ही जनरल एंटी एवाइडेंस रूल्स (गार) के प्रावधान प्रभावी होंगे। सरकार ने अगले साल अप्रैल से गार को लागू करने की मंशा जतायी है। केन्द्रीय राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने बुधवार को कहा कि अगर कर संधि के दुरुपयोग की बात प्रमाणित हो जाती है, तो गार प्रभावी हो जाएगा।