पेट्रोलियम (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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भारत तेल निर्यात करने वाले देशों के सगंठन ओपेक के सामने झुक सकता है। दुनिया की 35 फीसदी मांग को पूरी करने वाले तेल निर्यातक राष्ट्रों की बैठक में कीमतें बढ़ाने के लिए उत्पादन घटाने पर चर्चा होगी। उम्मीद है कि पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान 25 मई को विएना में होने वाली बैठक में नरम रुख अपनाएंगे। अमेरिका के बढ़ते दबाव और हस्तक्षेप से इन देशों के बीच स्थिरता बनी हुई है।
विएना जाने से पहले प्रधान ने एक अखबार से बात करते हुए कहा, "पीएम मोदी ने तेजी से भारत के विकास के लिए रास्ता तैयार किया है। हमें अपनी जरूरतों और गरीबों की भलाई के लिए एनर्जी की आवश्यकता है। यह ओपेक देशों के लिए बड़ा अवसर है।" आधिकारिक सूत्रों के अनुसार प्रधान पूरी तैयारी के साथ विएना जा रहे हैं। उनके साथ निजी क्षेत्रों से भी तेल कंपनियों के प्रतिनिधि इस बैठक में हिस्सा लेंगे।
बताया जा रहा है कि भारत की क्षमता अभी 230 मिलियन टन तेल के निर्माण की है, जिसे वो बढ़ाकर 600 मिलियन टन करना चाहता है। इस बात की नजरअंदाज करना ओपेक देशों की भूल साबित हो सकती है। अभी दुनिया भर में तेल की मांग 96.3 मिलियन बैरल प्रति दिन की है। इसमें 1.2 फीसदी यानी 1.26 मिलियन बैलर प्रतिदिन की वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। इसमें 3.2 फीसदी यानी 4.53 मिलियन बैरल प्रतिदिन का हिस्सा भारत का होगा। वही चीन सिर्फ 0.28 मिलियन बैरल प्रतिदिन की दर से वृद्धि कर सकता है।