भारत और चीन का वैश्विक व्यापार में प्रभाव बढ़ रहा है। इससे जी-7 देशों के बजाय ब्रिक्स समूह को महत्व बढ़ रहा है। जी-7 देशों अमेरिका, जापान, जर्मनी जैसे देश शामिल हैं। ईवाई इंडिया की एक हालिया रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस बदलाव में मुख्य भूमिका भारत और चीन की है। इसमें कहा गया है कि ब्रिक्स प्लस समूह की वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी बढ़ी है। साल 2000 में ब्रिक्स देशखों का निर्यात का हिस्सा केवल 10.7 फीसदी थी। यह हिस्सेदारी 2023 में बढ़कर 23.3 फीसदी हो गई। वहीं, जी-7 देशों की हिस्सेदारी इसी अवधि में 45.1 फीसदी से घटकर 28.9 फीसदी रह गया।
इसमें कहा गया है कि 2026 ताकत ब्रिक्स प्लस समूह का निर्यात जी-7 समूह से अधिक हो सकता है, अगर इसमें नए देश शामिल होते हैं। ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डी. के. श्रीवास्तव के मुताबिक, ब्रिक्स प्लस की निर्यात में बढ़ती भागीदारी वैश्विक व्यापार में इसके प्रभाव को मजूबत कर रही है। चीन का इस बदलाव में सबसे बड़ा योगदान है, जहां ब्रिक्स प्लस निर्यात में उसका हिस्सा 2000 में 36.1 फीसदी से बढ़कर 2023 में 62.5 फीसदी हो गया। भारत ने भी 2023 में ब्रिक्स प्लस निर्यात में 7.9 फीसदी का योगदान दिया है।
इसके अलावा, ब्रिक्स प्लस देशों के उच्च-तकनीकी उत्पादो के निर्यात में भारी वृ्द्धि हुई है, जो 2000 में पांच फीसदी से बढ़कर 32.8 फीसदी पहुंच गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अमेरिकी डॉलर की वैश्विक मुद्रा के रूप में स्थिति कमजोर हुई है। 2000 में इसका हिस्सा 71.5 फीसदी था, जो 2024 में घटकर 58.2 फीसदी रह गया। यह बताता है कि भविष्य में एक बहु राष्ट्रीय मुद्राणी प्रणाली का उदय हो सकता है।
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