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यशवंत ने फिर कसा तंज- गिरती अर्थव्यवस्था का दोष UPA को नहीं दे सकते, हम पर बहुत समय था

Thu, 28 Sep 2017 01:34 PM IST
amarujala.com- Presented By: अनंत पालीवाल
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- फोटो : ANI
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देश की अर्थव्यवस्था पर लिखे अपने लेख को लेकर घिरे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने सफाई पेश की है। उन्होंने कहा कि बहुत दिनों से हम जानते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था में गिरावट आ रही थी। न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए सिन्हा ने कहा कि 2014 से पहले मैं बीजेपी का प्रवक्ता था, लेकिन जब आर्थिक मामलों की बात आई तो हमने यूपीए सरकार की कार्यप्रणाली को पॉलिसी पैरालिसिस कहा था। 
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Long run ki baat hoti hai, lekin mujhe Keynes ka ek quote yaad aata hai, 'In the long run we are all dead': Yashwant Sinha pic.twitter.com/UDeLJZHMF8— ANI (@ANI) September 28, 2017
If you leave out Congress finance ministers then I am the only person who presented 7 budgets: Yashwant Sinha — ANI (@ANI) September 28, 2017   Before 2014,I was party spokesperson when it came to economic affairs,& we used to call UPA situation then 'Policy Paralysis':Yashwant Sinha pic.twitter.com/OHlH32scrx — ANI (@ANI) September 28, 2017
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पढ़ें- पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा का जेटली पर हमला- नोटबंदी और गिरती अर्थव्यवस्‍था पर कसा तंज

सिन्हा ने कहा कि, हम इससे पहले की सरकार को दोष नहीं दे सकते क्योंकि हमें अर्थव्यवस्था को सुधारने का पूरा मौका मिला। मैं पहली जीएसटी का सपोर्टर था। सरकार जुलाई में इसे लागू करने की जल्दी में थी। लेकिन ये फेल हो गया है। 

#Demonetisation shouldn't have been brought when economy was weak, its effects were yet to subside & GST served as second big blow: Y.Sinha pic.twitter.com/P1BrJVMbTQ— ANI (@ANI) September 28, 2017


सिन्हा ने आगे कहा कि आज देश की जनता चाहती है कि रोजगार मिले, पर जिससे पूछो वो ही कहता है कि रोजगार है ही नहीं। 
  Aaj desh ki janta chahti hai ki rozgaar mile, par jisse pucho woh kehta hai ki rozgaar hai hi nahi: Yashwant Sinha pic.twitter.com/ABlZc6CCVG — ANI (@ANI) September 28, 2017
इंडियन एक्सप्रेस के लिए लिखे गए लेख में सिन्हा ने देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली पर निशाना साधा था। सिन्हा ने लिखा है कि उनका यह लेख देश के बड़े तबके की तरफ से है जिसमें बीजेपी के वे लोग भी शामिल हैं जो कुछ भी बोलने से डरते हैं। सिन्हा ने लिखा है कि लोकसभा चुनाव 2014 के नतीजे आने से पहले ही तय हो गया था कि अरुण जेटली ही वित्त मंत्री होंगे ऐसे में उनका लोकसभा चुनाव हार जाना भी आड़े नहीं आया था। 

सिन्हा ने लिखा कि वह भी वित्त मंत्री रहे हैं और जानते हैं कि कितनी मेहनत करनी पड़ती है। सिन्हा ने आगे कहा कि ऐसे में जेटली के कंधे पर चार मंत्रालयों की जिम्मेदारी देना भी ठीक नहीं था।
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बैंकों की हालत को सुधारने की पहले थी जरुरत

यशवंत सिन्हा
सिन्हा ने कहा कि सबसे पहले जो टास्तक इस सरकार के पास था वो बैंकों की हालत को सुधार करने का था। लेकिन अभी तक हम लोगों को इसके लिए इंतजार करना पड़ रहा है। 
  Sabse pehla task jo is sarkar ke paas tha ki Banks ki haalat ka sudhaar karo, jiska hum log abhi tak intezaar hi kar rahe hain: Y Sinha pic.twitter.com/Tb0ZQ9xQh2 — ANI (@ANI) September 28, 2017   #Demonetisation shouldn't have been brought when economy was weak, its effects were yet to subside & GST served as second big blow: Y.Sinha pic.twitter.com/P1BrJVMbTQ — ANI (@ANI) September 28, 2017
सिन्हा ने जीएसटी को खराब तरीके से लागू किया गया प्लान बताया। सिन्हा ने लिखा केंद्र सरकार कहती है कि गिरती अर्थव्यवस्था के लिए जीएसटी जिम्मेदार नहीं है, दरअसल वह ठीक कह रही है। यह सब तो उससे काफी पहले ही शुरू हो गया था। 

यशवंत सिन्हा ने लेख के आखिर में यह भी लिखा कि पीएम नरेंद्र मोदी दावा करते रहे हैं कि उन्होंने गरीबी काफी करीब से देखी है और वित्त मंत्री बाकी सभी भारतीयों को भी उतने ही करीब से गरीबी दिखाने के लिए काम कर रहे हैं। सिन्हा ने लिखा कि अगर वह अब भी नहीं बोलेंगे तो यह उनकी राष्ट्र के प्रति जो ड्यूटी है उसके खिलाफ होगा। 
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