जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी को दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को बड़ी राहत दी। हाईकोर्ट ने नापा के उस आदेश पर स्थगनादेश जारी कर दिया, जिसमें कंपनी को 230 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जमा कराने के लिए कहा गया था। अगली सुनवाई 24 सितंबर को की जाएगी।
जॉनसन एंड जॉनसन पर आरोप है कि उसने कथित तौर पर बाल उत्पादों समेत अपने कुल 306 उत्पादों पर सरकार की तरफ से घटाई गई जीएसटी का लाभ अपने उपभोक्ताओं को दाम में कमी के जरिये नहीं देकर इस रकम की मुनाफाखोरी की है। राष्ट्रीय मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण (नापा) ने यह आदेश पिछले साल 23 दिसंबर को जारी किया था, जिसके खिलाफ जॉनसन एंड जॉनसन ने अपील की थी।
जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस संजीव नरूला की पीठ ने केंद्र सरकार और नापा को इस मामले में जॉनसन एंड जॉनसन के खिलाफ अगली सुनवाई तक किसी भी तरह का जुर्माना लगाने से भी रोक दिया है। पीठ ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया एनएपीए ने मुनाफाखोरी का पता लगाने के लिए जिस कार्यप्रणाली का उपयोग किया वह ‘दोषपूर्ण’ थी।
पीठ ने केंद्र सरकार, नापा और महानिदेशक (मुनाफोखोरी रोधी) को नोटिस भी जारी किया है, जिसमें कंपनी की तरफ से कथित मुनाफोखोरी की रकम को उपभोक्ता कल्याण फंड में जमा कराने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब मांगा गया है।